जिले में सरकारी कामाें का क्या हाल हाे रहा है? प्रशासनिक व्यवस्थाएं कैसे चल रही हैं? इसका उदाहरण है कलेक्ट्रेट की लिफ्ट और राेज खामियाजा भुगत रहे राधेश्याम पुराेहित जैसे लाेग। कलेक्ट्रेट में सैकड़ाें लाेग राेज राहत की उम्मीद में आते हैं। इनमें कई बुजुर्ग और दिव्यांग हाेते हैं। कृषि भूमि में नामांतरण संबंधी समस्या का आसींद तहसील स्तर पर समाधान नहीं हाेने से ब्राह्मणाें की सरेरी के राधेश्याम 15 दिन में दाे बार कलेक्टर के पास आ चुके।
कलेक्टर का चैंबर समेत कई महत्वपूर्ण कार्यालय दूसरी मंजिल पर हैं। जहां तक पहुंचने के लिए ऊंची-ऊंची सीढ़ियां बनी हुई हैं। ये सीढ़ियां चढ़ना दिव्यांगाें व बुजुर्गाें के लिए आसान नहीं हाेता। लिफ्ट बनना प्रस्तावित है जिसके कागजात 5 साल से भीलवाड़ा और दिल्ली के बीच चल रहे हैं।
यूआईटी ने 2016 में टेंडर कर दिए थे
नगर विकास न्यास से सबसे पहले यहां लिफ्ट बनाने के लिए 2015 में ट्रस्ट की बैठक में प्रस्ताव लिया। कुल 15 लाख रुपए लागत का तखमीना बनाने के बाद 7 अक्टूबर 2016 काे ठेकेदार श्यामलाल डाड काे वर्क ऑर्डर जारी कर दिया। तत्कालीन भाजपा सरकार ने यूआईटी में गाेपाल खंडेलवाल काे चेयरमैन बनाया। इसके बाद ट्रस्ट के पूर्व में लिए सारे प्रस्ताव व वर्क ऑर्डर निरस्त कर दिए। कलेक्टर के निर्देश पर लिफ्ट बनाने के लिए प्रक्रिया एक बार फिर शुरू हुई है। अब पीडब्लूडी और दिल्ली में सामाजिक न्याय मंत्रालय में फाइलें चल रही हैं।
सामाजिक न्याय विभाग से स्वीकृति
सार्वजनिक निर्माण विभाग ने 25 नवंबर 2019 व 29 नवंबर 2019 काे केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की संयुक्त सचिव सारिका राॅय काे मांग पत्र भेजे। वहां से विस्तृत प्लानिंग मांगी। मुख्य इमारत में वर्तमान में जहां सीढ़ियां हैं, उसके ठीक दूसरी तरफ लिफ्ट के लिए स्थान बताते हुए फाेटाे आदि भिजवाए गए। रैंप, रेलिंग सहित 14.84 लाख रुपए का खर्च बताया गया। विभाग ने 18 फरवरी 2020 काे लिफ्ट स्वीकृत कर दी। वर्क ऑर्डर जारी हाेता इसके पहले ही लाॅकडाउन लग गया। अब अनलाॅक-2 चल रहा है लेकिन लिफ्ट निर्माण शुरू नहीं हुआ।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Via Dainik Bhaskar https://ift.tt/1PKwoAf
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें