अकाल हो या फिर बाढ़। हर आपदा का बाड़मेरवासियों ने डटकर मुकाबला किया। विकट हालातों में हिम्मत नहीं हारना कोई बाड़मेर के लोगों से सीखे। कोरोना महामारी में देश-दुनिया में खौफ इस कदर था कि लोग तीन माह तक अपने घरों से बाहर नहीं निकले।

संकट के इस दौर में बाड़मेर के लोगों ने मेहनत का साथ नहीं छोड़ा। लॉक डाउन के दो माह में गांवों में दस हजार मकान बना दिए।चौंकाने वाली बात यह है कि कोरोना महामारी में जब हर कोई अपनी जिंदगी को बचाने के लिए संघर्ष में जुटा था।

उस दौर में ग्रामीणों ने एक दिन भी आराम नहीं किया। नतीजतन दो माह में दस हजार आशियाने बना दिए। इतना ही नहीं करीब पांच हजार मकानों का काम चल रहा है। यानी दो माह में करीब पंद्रह हजार मकानों का निर्माण शुरू हो चुका है।

औसत हर गांव में बीस नए मकान बनकर तैयार हो गए। इसमें पीएम आवास योजना के आवास भी शामिल है। इधर, कोरोना महामारी में घर लौटे प्रवासी भी होम क्वारेंटाइन में रहने के बाद मनरेगा में मजदूरी कर रहे हैं। इतना ही नहीं खेती के साथ दूसरे कामों में भी हाथ बंटा रहे हैं।

हर पंचायत में 20 से 30 मकान बने, मजदूरी के बचाए 2 करोड़

लॉकडाउन 24 मार्च को ही लागू हो गया था। अप्रैल के पहले सप्ताह से ही लोगों ने मकान बनाने का मानस बना लिया, लेकिन कारीगर व मजदूरों का संकट खड़ा हो गया। गांव के ही कारीगर बुलाए और परिवार के सदस्य ही मजदूरी के काम में जुट गए। इस तरह किसी ने एक माह में तो किसी ने दो माह में ही मकान रहने लायक बना दिए। 489 पंचायतों में दस हजार मकान तैयार हुए। औसत एक पंचायत में 20 से 30 घर बना दिए। बड़ी बात यह है कि लॉकडाउन में ग्रामीणों ने मजदूरी पेटे दो करोड़ रुपए बचा लिए। इसकी वजह घर के ही लोग काम में लगे।

25 हजार आवास मंजूर, 24 हजार की तीसरी किस्तें भी जारी

जिले में पीएम आवास योजना से मार्च तक 25 हजार 579 आवास मंजूर हुए। अप्रैल व मई में 489 पंचायतों में 7743 आवासों की पहली किस्त जारी की गई। इसके साथ ही पात्र लोगों ने आवास निर्माण का काम शुरू कर दिया। इसके बाद 9559 लोगों को दूसरी किस्त का भुगतान किया गया।

आवासों का नब्बे फीसदी काम पूरा होने पर 6922 परिवारों को तीसरी किस्त का भी भुगतान किया गया। यानी 24 हजार 224 लोगों को तीन-तीन किस्तें मिल गई। छह माह का लक्ष्य दो माह में ही पूरा गया। दस फीसदी शेष रहा काम भी अब लगभग पूरा होने वाला है।

20 हजार प्रवासी मनरेगा में चला रहे हैं गेंती व फावड़ा

कोरोना महामारी में दूसरे राज्यों से लौटे प्रवासियों को आराम रास नहीं आ रहा है। 14 दिन तक होम क्वारेंटाइन में रहने के बाद घर पर ही मजदूरी में जुट गए हैं। जिले में करीब 20 हजार प्रवासी मनरेगा में दिहाड़ी मजदूरी कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि मुम्बई, अहमदाबाद समेत बड़े शहरों में हैंडीक्राफ्ट के ठेकेदार, बिजनेस मैन भी अपने गांव में मजदूरी कर रहे हैं।

हड़वा गांव के तीस युवा मनरेगा योजना के तालाब खुदाई के काम में बीते बीस दिनों से काम कर रहे हैं। अहमदाबाद में हैंडीक्राफ्ट के ठेकेदार सवाईसिंह बताते हैं कि लॉकडाउन लागू होते ही सभी प्रवासी घर आ गए थे। खाली बैठे रहने की बजाय काम करने की ठान ली। सुबह आठ बजे तालाब पर पहुंच जाते हैं और दोपहर दो बजे तक काम कर रहे हैं।

जिले में 24 हजार मकानों का काम शुरू

  • कोरोना महामारी में लोग अपने घरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं थे। हर किसी में भय और खौफ था। उस दौर में बाड़मेर के लोगों ने मेहनत करने की ठान ली। जिले की 489 पंचायतों में पीएम आवास योजना में सिर्फ दो माह में ही पांच हजार आवास बना दिए। पांच हजार मकान लोगों ने अपने स्तर पर भी बनाए। बड़ी बात यह है कि 25 हजार आवासों के मुकाबले 24 हजार आवासों का काम शुरू हो गया। किसी की दीवारें खड़ी हुई तो किसी का छत का काम पूरा हो चुका है।-मोहनदान रतनू, सीईओ, जिला परिषद।


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Villagers built 10 thousand houses in 60 days of lockdown, 20 new houses populated in every village
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