अब देश में राजनीति हलकी होती जा रही है। सरकार बनाने के लिए पक्ष-विपक्ष मर्यादाएं भी लांघ रहे हैं। इसका असर सियासत की नींव कही जाने वाली यूनिवर्सिटी में भी दिखने लगा है। छात्र राजनीति की इस पहली सीढ़ी को भी गलत तरीके से चढ़ रहे हैं। शुक्रवार को जेएनवीयू में एबीवीपी का एक छात्र नेता त्रिवेंद्रपाल सिंह कुलपति की टेबल पर चढ़कर नारे लगाने लगा।

अचरज तो इस बात का है कि उसे किसी साथी ने रोका तक नहीं। एक शिक्षक के कहने पर नीचे उतरा और फिर छात्रों ने अपनी बात कुलपति के सामने रखी। भास्कर ने शनिवार के अंक में इस खबर को ये गलत है... टैग के साथ छापा, ताकि हमारे देश के ये भावी नेता अभी संभल जाएं और सियासत सही तरीके से सीखें।
जेएनवीयू ने दिए मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश सरकार में राजस्व मंत्री हरीश चौधरी, पूर्व बीजेपी एमएलए बाबूसिंह राठौड़, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत जैसे कई उदाहरण हैं, जिन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत विश्वविद्यालय स्तर से की है।

पहले भी ऐसे आंदोलनों काे गलत ठहराया था

  • जेएनवीयू में पूर्व रजिस्ट्रार निर्मला मीणा के समक्ष स्टूडेंट्स अपनी मांगों को लेकर अर्धनग्न अवस्था में पहुंचे थे। महिला अधिकारी के समक्ष केवल पेंट पहने छात्रों ने मांग रखी, जिसे उचित नहीं ठहराया गया।
  • पूर्व कॉमर्स फैकल्टी में पूर्व डीन एलसी भंडारी को कुर्सी समेत बाहर ले जाया गया। स्टूडेंट्स अति उत्साहित हो डीन के साथ बदतमीजी करने लगे। तब भी स्टूडेंट्स के रवैये पर काफी नाराजगी दर्ज करवाई थी।
  • पूर्व कुलपति प्रो. नवीन माथुर के समय कुछ स्टूडेंट्स ने केंद्रीय कार्यालय में तोड़फोड़ की और गमले, कुर्सियां उठाकर फेंक दीं। तब भी यह मैसेज बाहर आया था कि छात्र प्रदर्शन की सीमाएं लांघ जाते हैं।

छात्र नेता ने खुद को सही बताया...
मेरा मकसद सही था... बदतमीजी भी नहीं की

  • आंदोलन के दौरान अलग-अलग तरीकों से प्रशासन को अपनी बात पहुंचाने के प्रयास किए जाते हैं। मैं टेबल पर सिर्फ इसलिए चढ़ा, ताकि कुलपति को स्टूडेंट्स की परेशानी समझ आए। वे हमारी बात नहीं सुन रहे थे और बिना कुछ कहे उठकर चले गए थे। मैंने अभद्र व्यवहार नहीं किया, बदतमीजी नहीं की। छात्र हितों के लिए यह प्रदर्शन का एक तरीका था। मकसद गलत नहीं था और ना ही तोड़फोड़ की। - त्रिवेंद्रपाल सिंह राठौड़

विवि बचाव की मुद्रा में...
आंदोलन करने वाले हमारे ही स्टूडेंट्स, कई बार समझाते हैं

  • विवि के चीफ प्रोक्टर ने कहा कि जो आंदोलन करने आते हैं, वे हमारे ही स्टूडेंट्स हैं। अपनी बात कहने के लिए कोई क्या तरीका अपनाता है, यह उन पर निर्भर है, लेकिन हमेशा मर्यादा और अनुशासन में रहकर ही बात करते हैं। कभी-कभार अतिउत्साह हो जाता है। पर हमारा मकसद उन्हें समझाकर सही रास्ते पर लाना है। -एसएस सांखला, चीफ प्रोक्टर

गलत तरीके से प्रदर्शन विद्यार्थी हित में सही नहीं

  • लोकतंत्र में सबको बात रखने का हक है, विद्यार्थियों की समस्याएं विवि प्रशासन तक पहुंचाना छात्र संगठनों का प्रमुख कार्य, लेकिन कुछ संगठन जिस तरह से विरोध प्रदर्शन करते हैं, वह विद्यार्थी हित में नहीं है। इससे नए विद्यार्थियों में गलत संदेश जाता है। युवाओं में जोश शुभ संकेत है, लेकिन होश भी होना चाहिए। -दिनेश परिहार, अध्यक्ष, एनएसयूआई

हम भी प्रदर्शन करते थे, मर्यादा कभी नहीं ताेड़ी

  • हमने भी छात्र जीवन में आंदोलन किए हैं। जायज मांगें मंगवाने के लिए कुलपति कक्ष में 2-2 दिन तक धरना दिया, लेकिन मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया, क्योंकि जिनके समक्ष प्रदर्शन करना है, वे हमारे ही हैं। कभी-कभी जोश में स्टूडेंट्स आ जाते हैं, इसलिए विवि प्रशासन को पहल कर उनकी मांगों को सुनना चाहिए।-बाबूसिंह राठौड़, पूर्व भाजपा विधायक

सीधी बातकुलपति प्रो. पीसी त्रिवेदी से सीधी बात
स्टूडेंट्स काे सजा देनाहल नहीं, हां, गलती का मैसेज जरूर देते हैं

Q. विवि में रोज प्रदर्शन हो रहे, परेशानी क्या?
A. पेंशनर्स को पेंशन चाहिए तो स्टूडेंट्स को परीक्षा रद्द और फीस माफी। सब की मांगें जायज हैं। सभी परेशानियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
Q. फीस के मुद्दे पर आपका क्या कहना है?
A. फीस माफी का निर्णय सरकार के हाथ में है। सरकार निर्देश दे तो तुरंत अनुपालना करेंगे।
Q. अभी सोशल डिस्टेंसिंग अनिवार्य है, फिर भी आपके कक्ष में कई बार नियम टूटे?
A. ये बातें हम समझाते हैं, सोशल डिस्टेंसिंग की पालना और मास्क लगाने के लिए कहते हैं, पर वे अपनी बात लेकर मेरे पास नहीं आएंगे तो कहां जाएंगे। मुझे उनकी समस्या भी हल करनी है।
Q. शुक्रवार को एबीवीपी के छात्र आपकी टेबल पर चढ़ गए, क्या इसे सही मानते हैं?
A. सारे हमारे स्टूडेंट्स हैं, वे अपनी बात कहने के लिए आए थे। सजा देना किसी समस्या का हल नहीं है। हां, गलती होने पर मैसेज दिया जाता है।
Q. तीन दिन से पेंशनर्स धरना दे रहे हैं?
A. विवि में 1500 से अधिक पेंशनर्स हैं और पैसा है नहीं। सरकार से लगातार वार्ता चल रही है, उम्मीद है जल्द पैसा आ जाएगा।



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