नगरपरिषद में पांच पार्षदों के मनोनीत होने और मंत्रिमंडल के विस्तार की सुगबुगाहट के बीच यूआईटी के अध्यक्ष पद को लेकर भी अटकलबाजियां बढ़ी हैं। अध्यक्षी के चाहवान अब सोशल मीडिया पर पोस्ट वार कर रहे हैं। उनके समर्थकों में भी लॉबिंग करने की होड़ लगी हुई है। अध्यक्ष पद के चाहवानों की ओर से जयपुर में भी अपनी पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ मिलकर लॉबिंग की जा रही है।
मंगलवार को सोशल मीडिया पर यूआईटी अध्यक्ष पद के लिए पैसे के खेल से संबंधित पोस्ट भी चर्चा में रही। हालांकि अभी तक सरकार बने हुए पौने दो साल ही हुए हैं। अब तक के रिकॉर्ड के अनुसार पिछले कुछ समय से सरकारें यूआईटी का अध्यक्ष अपना आधा कार्यकाल बीतने के बाद ही मनोनीत करती हैं। यूआईटी के अब तक मनोनीत 6 अध्यक्षों में से दो अध्यक्ष राधेश्याम गंगानगर और राजकुमार गौड़ ही अपना कार्यकाल पूरा कर सके हैं।
व्यापारी, वकील और नेता सबके अपने-अपने दावे, कार्यकर्ता खूब कर रहे लाइक्स और शेयर
सोशल मीडिया चल रहे पोस्ट वार में कई नेता यूआईटी के लिए दावा कर रहे हैं। इसमें एक बार निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके एक नेता की ओर से यूआईटी अध्यक्ष के अलावा पंजाबी एकेडमी के अध्यक्ष के तौर पर दावा जताया जा रहा है। वहीं, एक विधायक के नजदीकी माने जाने वाले वकील और एक व्यापारी नेता का नाम भी सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इस पर दावेदारों के समर्थकों की ओर से माहौल बनाने के लिए कमेंट्स, लाइक्स और शेयर पर जोर दिया जा रहा है।
सीट बिके नहीं, काम करने वाले कांग्रेसी को मौका मिले
इसी बीच एक कांग्रेसी पार्षद की साेशल मीडिया पर पोस्ट चर्चा में है। इस पाेस्ट के अनुसार इस बार यूआईटी के अध्यक्ष पद की पोस्ट को बिकने नहीं देना चाहिए। पैसे का खेल शुरू हो चुका है। इस पद पर किसी ईमानदार और काम करने वाले कांग्रेसी को ही पदस्थ करने की मांग की गई है। इस पोस्ट पर एक मनोनीत पार्षद के पति ने विधानसभा चुनाव के राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कमेंट किया है कि आप पार्टी पर भरोसा मत करो, अब भी करोड़ों में यूआईटी की अध्यक्षी जाएगी।
...खींचतान भी, कांग्रेस के दोनों धड़ों में जोर आजमाइश
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस नेता अशोक चांडक और निर्दलीय विधायक राजकुमार गौड़ के गुट के बीच यूआईटी का अध्यक्ष पद लेने के लिए जोर आजमाइश चल रही है। दोनों अगले विधानसभा चुनाव से पूर्व अपना वर्चस्व साबित करने के लिए अपने-अपने नजदीकी नेता को ये पद दिलाने के लिए जोर लगा रहे हैं। नगरपरिषद में पांच पार्षदों के मनोनयन के बाद यूआईटी अध्यक्ष पद की दौड़ तेज हो गई है।
भास्कर रिकॉल,राधेश्याम विधायक रहते अध्यक्ष बने, दो बार का रिकॉर्ड
राधेश्याम गंगानगर विधायक रहते हुए 1980 में यूआईटी के अध्यक्ष बने। वे इस पद पर दाे बार रहे। राधेश्याम गंगानगर का कार्यकाल 20 जून 1981 से 5 जून 1987 तक रहा। विधायक रहते यूआईटी अध्यक्ष बनने, दो बार अध्यक्षी करने और सबसे लंबे 6 वर्ष 11 महीने कार्यकाल का रिकॉर्ड राधेश्याम गंगानगर के नाम ही है।
इसके बाद राजकुमार गौड़ ने तीन साल का कार्यकाल पूरा किया। गौड़ 3 जून 2000 से 5 जून 2003 तक 3 वर्ष 2 दिन तक अध्यक्ष पद पर रहे। यूआईटी के अध्यक्ष का कार्यकाल 3 वर्ष का होता है। हालांकि सरकार इससे कम अवधि का भी कर सकती है। कार्यकाल की अवधि बढ़ा भी सकती है। अब तक यूआईटी के 30 अध्यक्ष रहे हैं।
इसमें छह अध्यक्ष मनोनीत किए गए हैं। बाकी 24 अध्यक्ष प्रशासक के रूप में कलेक्टर रहे हैं। चार मनोनीत अध्यक्ष जेबी जोशी, सीमा पेड़ीवाल, ज्योति कांडा और संजय महिपाल अपना तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। सीमा पेड़ीवाल एक वर्ष 5 महीने, कांडा व महिपाल 2-2 वर्ष और जेबी जोशी 2 वर्ष 11 महीने अध्यक्ष रहे। सीमा पेड़ीवाल, कांडा और महिपाल को सरकार बदलने की वजह से पद छोड़ना पड़ा।
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