राजस्थान में अब राज्य सरकार की अनुमति के बिना सीबीआई की एंट्री नहीं हो सकेगी। इस बाबत गृह विभाग ने अधिसूचना भी जारी कर दी है। गहलोत सरकार का यह फैसला फोन टैपिंग कांड में गृह मंत्रालय द्वारा रिपोर्ट तलब करने के दूसरे ही दिन आया है।

दरअसल, विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले में दलाल संजय जैन की फोन टैपिंग को लेकर गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार को नोटिस भेजकर पूछा था कि किन नियमों के तहत ऐसा किया गया। इसके बाद कांग्रेस नेताओं की ओर से यह आशंका जताई जाने लगी कि इनकम टैक्स, ईडी के बाद अब सीबीआई भी इस राजनीतिक घमसान में उतारी जा सकती है।

हालांकि, यह अधिसूचना नई नहीं है। राज्य सरकार ने 1990 में ही केंद्र सरकार को पत्र लिखकर यह अवगत करवा दिया था कि सीबीआई जांच के मामलों में राज्य सरकार केस टू केस ही सहमति देगी। अधिसूचना में साफ कहा गया है कि आईपीसी से जुड़े मामलों की जांच करने के लिए यदि सीबीआई को राजस्थान आना है तो उसे पहले राज्य सरकार की सहमति लेनी होगी। हालांकि अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय व इंटर स्टेट मामलों में अब भी सीबीआई को राज्य सरकार की सहमति लेने की जरूरत नहीं है।



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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (फाइल फोटो)
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