प्रदेश में कोरोना नियंत्रण में पूर्व सैनिकों का सहयोग लेने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंस के जरिए सैनिक कल्याण विभाग के अधिकारियों और भूतपूर्व अधिकारी जवानों से संवाद किया। गहलोत ने पूर्व सैनिकों से बातचीत करते हुए कहा कि मुझे आप पर गर्व है।

उन्होंने कहा कि मैं उस प्रदेश का मुख्यमंत्री हूं जहां घर-घर में सीमओं की रक्षा के लिए शहादत देने का जज्बा है। वीसी के दौरान पूर्व सैनिकों ने कहा कि पहली बार प्रदेश के किसी मुख्यमंत्री ने सीधे पूर्व सैनिकों के साथ संवाद की पहल की है।

इससे उनका मनोबल बढ़ा है और वे कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए किए जा रहे राज्य सरकार के प्रयासों में पूरी तरह से सहयोग करेंगे। गहलोत ने कहा कि किसी भी संकट के समय फौजी सबसे पहले आगे आते हैं। कोरोना संक्रमण से हमारी जंग में भी पूर्व सैनिकों ने वाॅलेंटियर के रूप में आगे आकर मदद की है।

सभी पैरामीटर्स पर राजस्थान आगे

राजस्थान को कोरोना संक्रमण रोकने की इस लड़ाई में अग्रणी पायदान पर रखा। मृत्यु दर न्यूनतम रहने के साथ ही रिकवरी रेट काफी बेहतर रही है। मरीजों की संख्या दोगुनी होने में लगने वाले दिनों के पैरामीटर पर भी हम आगे हैं।

हमारी क्षमता 41 हजार 450 टेस्ट प्रतिदिन हुई

चिकित्सा मंत्री डाॅ. रघु शर्मा ने कहा कि कोरोना संक्रमण की शुरूआत के दौर में प्रदेश में टेस्टिंग सुविधा नहीं थी लेकिन आज हमारी क्षमता 41 हजार 450 टेस्ट प्रतिदिन हो गई है। उधर, परिवहन एवं सैनिक कल्याण मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास ने कहा कि प्रदेश में 1 लाख 92 हजार से अधिक पूर्व सैनिक एवं अधिकारी हैं जो राज्य सरकार के कोरोना जागरूकता के संदेश को आमजन तक पहुंचाएंगे। मुख्यमंत्री ने अपने डेढ़ साल के कार्यकाल में सैनिक कल्याण की दिशा में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं, जिससे प्रदेश के लोगों को काफी फायदा हुआ है।



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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (फाइल फोटो)
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