(प्रणीता भारद्वाज) लॉकडाउन में इलाज नहीं मिलने या लापरवाही बरतना कुछ लोगांे के लिए जानलेवा बन गया है। लॉकडाउन खुलते ही पेशेंट्स के हॉस्पिटल पहुंचने पर उनकी स्थितियां सामने आ रही हैं। विशेष रूप से लॉकडाउन का सबसे ज्यादा खामियाजा कैंसर पेशेंट्स को उठाना पड़ा है। रेडियोथैरेपी, कीमोथैरेपी और सर्जरी नहीं हो पाने की वजह से उनकी बीमारी एक स्टेज आगे पहुंच चुकी है। इसे लेकर पेशेंट्स ही नहीं, डॉक्टर भी परेशान हैं।

ओन्कोलॉजिस्ट डॉ. अजय बाफना ने बताया कि लॉकडाउन या अन्य किसी कारण से कैंसर सैल्स की ग्रोथ रुकती नहीं है। लॉकडाउन के बाद इलाज के लिए आने वाले 25 प्रतिशत लोगों में यह बीमारी बढ़ चुकी है। अगली स्टेज में इसका माइग्रेशन हो चुका है। यानी रेडियो, कीमोथैरेपी नहीं मिल पाने से फर्स्ट स्टेज के पेशेंट सैकंड, सैकंड के थर्ड और थर्ड वाले फोर्थ स्टेज में पहुंच गए हैं।

35 प्रतिशत की यही मालूम नहीं चल पाया कि बीमारी किस स्टेज पर है। 25 प्रतिशत पेशेंट्स में यह बीमारी फोर्थ स्टेज में पहुंच गई है। इस स्टेज में 30 प्रतिशत ही बचने के चांस होते हैं। कुछ पेशेंट्स कोरोना टेस्ट नहीं करवाना चाहते थे। यह भी इस बीमारी के बढ़ने की एक बड़ी वजह थी।

प्रोस्टेट, ब्रेस्ट की तुलना में गले, नाक, मुंह और लंग्स का कैंसर तेजी से बढ़ता है

दुनियाभर में कोविड के दौरान स्टडीज में देखा गया कि प्रोस्टेट कैंसर स्लो ग्रोइंग है। इसमें छह से आठ सप्ताह तक रेडियोथैरेपी नहीं मिलने पर सैल्स की ग्रोथ नहीं हुई। एसएमएस हॉस्पिटल के रेडिएशन विभाग के हैड डॉ. अरुण चोगले के मुताबिक - ब्रेस्ट कैंसर में 4-5 सप्ताह थैरेपी ना मिले तो भी यह ज्यादा नहीं बढ़ता। गले, नाक, मुंह, लंग्स कैंसर का रुक जाए तो अगली स्टेज पर चला जाएगा। ईएनटी एक्सपर्ट, डॉ. सतीश जैन ने बताया- कान की बीमारियों के इलाज में देरी से भी सुनाई नहीं देने के केसेज आ रहे हैं।

मोतियाबिंद के ऑपरेशन रुके, घाव पकने से दिखना ही बंद हो गया

डॉ. मुकेश शर्मा ने बताया- इस पीरियड में मोतियाबिंद का समय पर ऑपरेशन नहीं करवा पाने से यह पक गया। आंखों की रोशनी खत्म हो गई, उनके पास ऐसे 15 पेशेंट आ चुके हैं। जयपुर सहित राज्यभर में ऐसे और भी कई पेशेंट्स होंगे। आंखों में इंफेक्शन, कॉर्निया में अल्सर का जिन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पाया। उनकी आंखों की रोशनी कम हो चुकी है। आंखों का पर्दा, नसों के रोग, ब्लड प्रेशर से खून की नसों के फटने और उचित इलाज नहीं मिल पाने के कारण रोशनी को नुकसान हुआ है।



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