काम, क्रोध, लोभ, मोह के विकारों का आवेश मनुष्य को अंधा कर देता है। ​उसका विवेक ठीक काम नहीं करता, उचित-अनुचित, कर्तव्य-अकर्तव्य का उसे ध्यान नहीं रहता और वह उस प्रकार का व्यवहार कर बैठता है, जिससे उसका वर्चस्व, इज्जत खतरे में पड़ जाता है। ​
समाज में अपयश होता है, दूसरों से संबंध खराब होते हैं और वह अविश्वास का पात्र बन जाता है। यह बात बुधवार को जैन दिवाकर वल्लभबाड़ी से उपाध्याय मूलमुनि ने धर्म संदेश देते हुए कहा। उन्हाेंने कहा कि धन और यश में आसक्ति वाला मनुष्य लेन-देन में पक्षपात करता है, चोरी, ठगी और बेईमानी करता है, दूसरों को धोखा देता है, झूठे वादे करता है और चालाकी से काम लेता है।

वह भूल जाता है कि पक्षपात से समाज की व्यवस्था खराब होती है। चोरी और बेईमानी से असुरक्षा और भय की स्थिति पैदा होती है, जिसका प्रभाव स्वयं उसके ऊपर भी पड़ता है। इन सबसे दूर रहकर अपना जीवन सुंदर बना सकते हैं। चातुर्मास संयोजक मनीष जैन ने बताया कि चातुर्मास सरकारी नियमानुसार ही चल रहा है।

जैन दिवाकर युवा संघ महामंत्री ताराचन्द जैन ने बताया कि कोरोना महामारी को देखते हुए भगवान महावीर के निर्वाण के पश्चात वर्तमान में वर्धमान महावीर के शासन में ऐसा चातुर्मास पहली बार होगा।



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