अभावों के साथ लड़कर सफलता हासिल करना हो तो हिंगोली गांव के छात्र रमेश विश्नोई से सीखिए। घर में बिजली नहीं है। स्कूल जाने के लिए साइकिल भी नहीं। सरकारी स्कूल में पढ़ाई की। कोई टयूशन नहीं। मां-बाप दिहाड़ी मजदूर हैं। ऐसी परिस्थितियों को मात देते हुए रमेश ने हाल ही में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की दसवीं परीक्षा में 93.50 प्रतिशत अंकों के साथ स्कूल, गांव व परिवार का नाम रोशन किया।
रमेश विश्नोई के पिता लादूराम मजदूरी करते हैं। स्वयं अनपढ़ होते हुए अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए जी तोड़ प्रयास कर रहे हैं। रमेश ने परिवार की स्थिति को देखते हुए कभी भी अपने पिताजी से साइकिल या मोटरसाइकिल की मांग नहीं की और नहीं स्कूल बस में जाने की जिद की। अकेला ही हमेशा पांच किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाता था। स्कूल से वापस आकर पहले अपनी ड्रेस की धुलाई करता फिर पढ़ने बैठता और दूसरे दिन वही ड्रेस पहन कर स्कूल जाता।
ढाणी में पूरे दिन में 6 घंटे आती थी बिजली इसलिए लालटेन-चिमनी की रोशनी से की पढ़ाई
छात्र रमेश का आवास ढाणी में हैं। जहां अभी तक बिजली भी नहीं पहुंच पाई। लालटेन व चिमनी की रोशनी से पढ़कर परीक्षा दी। हालांकि पास में स्थित कृषि फार्म से बिजली के तारे खींचे लेकिन उस बिजली आपूर्ति का समय 24 घंटे में 6 घंटे कभी भी है। ऐसे में स्कूल में रहते वक्त तो कभी आधी रात बाद बिजली सप्लाई होने से यह बिजली भी उसके काम की नहीं थी।
रमेश विश्नोई के सरकारी स्कूल में पढ़कर ब्लॉक स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने पर समाजसेवी सलीम ठेकेदार ने उसके घर जाकर सम्मान किया और भविष्य में शिक्षा के लिए रमेश के माता-पिता से हर संभव सहयोग का वादा किया। इस दौरान गायक गणपतराम मेघवाल, ग्राम विकास अधिकारी रामप्रकाश ,मूलाराम , महादेव ,अनिल सहित अन्य लोगों ने भी रमेश को बधाई दी।
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