समय बदला, समय के साथ कई चीजें बदल गईं, सिर्फ नहीं बदली तो लोगों की रेडियो सुनने की दीवानगी। अब भी कई ऐसे श्रोता हैं जो पूरी शिद्दत से रेडियो सुनते हैं। यही वजह है कि हाईटेक होते इंटरटेनमेंट की दुनिया में लगातार रेडियो श्रोताओं की संख्या बढ़ती जा रही है। कई ऐसे रेडियो श्रोता हैं, जिनके साथ रेडियो हमराह की तरह है। कुछ ऐसे हैं जिनके पास रेडियो का बेहतरीन कलेक्शन है। रेडियो श्रोता दिवस मनाने की परंपरा शुरू करने का श्रेय छत्तीसगढ़ को जाता है। इस राज्य के रेडियो श्रोताओं ने भारत में 20 अगस्त 1921 को हुए प्रथम रेडियो प्रसारण की याद में हर साल 20 अगस्त के दिन श्रोता दिवस मनाने का जो सिलसिला 2006 से शुरू किया है वह तब से लगातार जारी है।
ये शौक है या जुनून
चंडीगढ़ के सतीश अनेजा 40 वर्षों से औसतन 8 घंटे रेडियो सुन रहे हैं, संगरिया के श्याम मिढा ने 1982 से 1990 तक प्रतिदिन 50 पोस्टकार्ड लिखे, श्रीकरणपुर के शिव सेठी सफर में भी रेडियो साथ रखते थे, केसरीसिंहपुर के बिलू सूद अपनी दुकान पर एक मिनट के लिए भी रेडियो बन्द नहीं करते, जिस समय दुनिया पूजा पाठ में व्यस्त होती है डबवाली के श्रोता अंग्रेज सिंह सुबह 6 से 8 बजे तक ईमेल लिखते हैं,50 जीबी के चन्दू राम सिंधी 50 वर्षो से बीबीसी सुन रहे हैं।
8 लोगों से शुरू किया श्रोता क्लब, अब 100 लोग, बाकियों को भी करते हैं प्रेरित
बीरमाना के श्रोता क्लब के जगदीश शर्मा ने बताया कि रेडियो के प्रति इतनी दीवानगी है कि हमने सोशल मीडिया पर रेडियो श्रोता का क्लब बनाया हुआ है। दिन भर उसमें बस रेडियो की बातें। उन्होंने बताया कि 1982 से 1995 के बीच हम बस श्रोता पत्र मित्र हुआ करते थे। 1995 के के बाद टीवी ने अपनी पहचान बनाई, लेकिन रेडियो पर कोई असर नहीं पड़ा। आज सोशल मीडिया के युग में रेडियो की पहचान धीरे-धीरे खत्म हो रही थी। इसके लिए हमने सोशल मीडिया को ही रेडियाे श्रोता के रूप में चुना। सोशल मीडिया पर एक ग्रुप बनाया। नाम दिया ‘रेडियो श्रोता क्लब’। पहले 8 लोग जुड़े। अब हमारे ग्रुप में करीब 100 से ज्यादा श्रोता है। जो दिनभर बस रेडियो की ही बात करते हैं।
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