(महेश शर्मा) आमेर महल की शान और पूरे आमेर कस्बे के भूजल का आधार मावठा और सागर लबालब है। हालांकि यह खुशी लंबे समय नहीं रहेगी, क्योंकि दोनों ही वाटर बॉडी की हालत खराब है। मावठे में 10 फीट गाद (मलबा) है, जिसको समय रहते नहीं निकाला गया। पहले तो इसके पानी के रास्ते ही अवरूद्ध पड़े थे, जिसे भास्कर की पहल पर खोला गया। इसके बाद जब मलबा हटाकर रेस्टोरेशन की बारी आई तो आमेर विकास प्राधिकरण, पुरातत्व और टूरिज्म के जिम्मेदार सोए रहे।
यही हाल सागर का है, जिसकी प्राचीन दीवारों को ठीक करने के लिए कई साल से मांग उठती आ रही है, चूंकि जब-तब पानी आता है तो कुछ समय में ही रिसकर खाली हो जाता है। कई सालों बाद आई अच्छी बरसात से संवरी तस्वीर फिर जिम्मेदारों की लापरवाही से सूखेगी। सामने आया कि मावठा 20 फिट के आसपास है, जिसमें 8-10 फिट मलबा जमा है। फिलहाल केवल 3-4 ईंच खाली है, इसके बाद ओवरफ्लो होगा, जबकि गर्द हटती तो ज्यादा पानी जमा होता और लंबे समय तक रिचार्ज होकर बेहतरीन तस्वीर दिखाता।
पत्रों की गंभीरता पर लापरवाह प्रशासन- कस्बे और महल के वास्ते मावठे में जमा मिट्टी-मलबे को हटाएं
आमेर महल प्रशासन की ओर से अप्रेल 2019 और फिर इस मानसून से पहले भी मावठे के हालात सुधारने को लिखा गया। इसमें आगाह किया कि मावठा पूरी तरह खाली है, मानसून से पहले मावठे में जमा हुए अतिरिक्त मिट्टी-मलबे को हटाया जाना चाहिए, ताकि पानी की अच्छी आवक हो सके।
14 साल पहले जब मावठा सूखा तो नहरों को ठीक कराया, मलबा हटाया
आमेर विकास प्राधिकरण को जिन उद्देश्यों के बनाया और शिद्दत से चलाया गया, अब हालात इसके उलट हैं। 2006-07 में आमेर महल के रेस्टोरेशन काम हुए, तब तत्कालीन सीईओ एस अहमद (पूर्व मुख्य सचिव) और एक्सपर्ट की टीम ने मावठे की नहरों को दुरुस्त कराया था।
मावठे में बरसों से जमा स्लज को हटाया गया। नतीजे सुखद थे। मावठे में बंपर पानी की आवक हुई। इसके बाद मावठे को संवारने पर ध्यान नहीं दिया। स्थानीय निवासी इकबाल, महल के गाइड रामचरण, कैलास आदि का कहना है कि ऐसा कोई कारण ही नहीं कि इन जलाशयों को नजरंदाज किया जाए, इनकी सुरक्षा नहीं होना घोर अपराध जैसा है।
आमेर प्राधिकरण: लापरवाही और फैलियर पर अनजान, जेडीए पर भी टालमटोल
^ मामले की जानकारी नहीं (लेकिन महल प्रशासन ने आपको लिखा है, एडमा ने देखा भी है, कुछ सर्वे भी किया था?) जेडीए के पास भी है। फिर भी पता करूंगा। -बालेंद्र सिंह, कार्यकारी निदेशक, आमेर विकास प्राधिकरण
झूठ पर जेडीए बोला- कोई लेना देना नहीं
^ मावठे का जेडीए से लेना-देना नहीं, न ही कभी कोई काम देखा गया।
-वीएस सूंडा, डायरेक्टर इंजीनियरिंग, जेडीए
पुरातत्व अफसर बोले: हमने एडमा को कहा था
^ हमने समय पर सूचित किया था कि मावठे की खुदाई कर मलबा निकालें
-पंकज धरेंद्र, अधीक्षक, आमेर महल
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Via Dainik Bhaskar https://ift.tt/1PKwoAf
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें