(शैलेंद्र माथुर) शहर में दाे नगर निगम बनने के बाद कई गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। दाेनाें निगमाें के बंटवारे में क्षेत्रफल का ताे ध्यान रखा गया, लेकिन इसमें आर्थिक स्थिति का ध्यान नहीं रखा। इस वजह से दक्षिण नगर निगम के हिस्से में आय के अधिक साेर्स आ गए, जबकि उत्तर के पास जिम्मेदारियां ज्यादा आईं। शहर की पाॅश कालाेनी में पड़े करीब 250 कराेड़ रुपए से अधिक कीमत के 52 प्लाॅट, माेटा यूडी टैक्स देने वाले बड़े शाेरूम, माॅल और बंगले भी दक्षिण में ही है।
इसके अलावा चंबल गार्डन, भीतरिया कुंड, 30 बड़े सामुदायिक भवन, एम्युजमेंट जाेन और बकरा मंडी आदि भी दक्षिण के ही पास है, जिनसे स्थायी आय हाेती है।
यदि काेटा उत्तर नगर निगम की बात करें ताे स्थिति बिल्कुल उल्टी है। यहां पर जिम्मेदारी और खर्च ज्यादा है और आय के साेर्स काफी कम हैं। ये क्षेत्र निगम के क्षेत्राधिकार में आता है, इसलिए यहां गलियाें से लेकर सड़काें तक का काम निगम काे करना पड़ता है। यहां यूडी टैक्स चुकाने वाली केवल 30 प्रतिशत बिल्डिंग हैं। खाली प्लाॅट नहीं हैं, जिन्हें बेचकर आय हाे सके। 800 दुकानें हैं, जाे 50 साल से 4 रुपए से 100 रुपए महीने के किराए पर चल रही है, जिससे मात्र 4 लाख रुपए सालाना आय हाेती है।
ऐसे पार्क भी नहीं हैं, जिनसे आमदनी हाे सके। सामुदायिक भवन भी छाेटे और जर्जर हैं, जिनसे ज्यादा आय नहीं हाेती। हालांकि ये कमी सरकारी अनुदान से पूरी हो जाएगी। उत्तर को सरकार से 110 करोड़, जबकि दक्षिण को 5.50 करोड़ का अनुदान मिलेगा। सरकार विशेष सहायता और आपदा प्रबंधन-सहायता के मद में अनुदान देगी।
यूं समझें सालाना आमदनी का अंतर और उसका असर
नगर निगम ने फरवरी में वर्ष 2020-21 का प्रस्तावित बजट तैयार किया था। इससे साफ है कि काेटा दक्षिण नगर निगम की आय अधिक है और उत्तर की कम। ये ताे मात्र एक साल का प्रस्तावित बजट है। टाेटल स्थायी संपत्ति दक्षिण के पास अधिक हाेने के कारण हर साल काेटा उत्तर काे आय में नुकसान हाेता रहेगा।
विशेषज्ञ बोले-उत्तर काे आमदनी बढ़ाने के नए जरिए ढूंढने पड़ेंगे
नगर निगम के अधिकारियाें और यहां रह चुके पूर्व अधिकारियाें का मानना है कि वास्तव में काेटा दक्षिण के पास संपत्तियां अधिक है और इसका लाभ हमेशा मिलता रहेगा। ये केवल एक वित्तीय वर्ष के बजट की बात नहीं है, बल्कि स्थायी संपत्तियां ताे दीर्घकालीन लाभ देती रहेंगी। उत्तर निगम काे अपनी आय बढ़ाने के लिए साेर्स डेवलप करने पड़ेंगे। वहीं उत्तर में आय के कई साेर्स काल्पनिक हैं। इस वित्तीय वर्ष का जाे प्रस्तावित बजट है उसमें काेटा उत्तर में संपतियाें काे बेचने से 40 कराेड़ रुपए की आय बता रखी है, जबकि वहां पिछले कई वर्षाें से एक जमीन नहीं बिकी।
यूडी टैक्स से आय 5 कराेड़ रुपए रखी है, जबकि पिछले वर्ष अविभाजित निगम ने कुल यूडी टैक्स ही 5 कराेड़ रुपए वसूला गया था, जिसमें सर्वाधिक दक्षिण क्षेत्र का था। हाेटल, मैस, सामुदायिक भवन, लघु उद्याेग आदि से भी उत्तर में आय बहुत कम हाेनी है।
सर्विस प्रोवाइडर के विवाद में 4 माह से नहीं जमा हाे रहा यूडी टैक्स, निगम काे 3 करोड़ का नुकसान
नगर निगम में ऑनलाइन कार्य आउटसाेर्सिंग पर हाेते हैं। पिछले कुछ समय से सरकार द्वारा इन कंपनियाें काे बार-बार बदला गया, जिससे सारा काम ठप हाे गया। फिलहाल निगम में कार्य कर रही कंपनी का कार्य राज्य सरकार ने निरस्त कर दिया, वहीं जाे पुरानी कंपनी थी, उसे पूरा काम नहीं साैंपा। ऐसे में यह ही तय नहीं हाे पा रहा है कि काैन सी कंपनी काम कर रही है। इसकी वजह से यूडी टैक्स का काम ठप हाे गया है।
पिछले 4 माह से न ताे यूडी टैक्स के बिल बन रहे हैं और न वसूली हाे रही है। जाे लाेग खुद हर साल नियम से टैक्स जमा करवाते हैं, उनका टैक्स भी जमा नहीं किया जा रहा है। हर साल अगस्त तक करीब 3 कराेड़ रुपए का टैक्स वसूल हाे जाता था। नगर निगम में पहले ऑनलाइन संबंधी सभी कार्य कई वर्षाें तक ओसवाल डेटा कंपनी के पास था। कुछ साल पहले ओसवाल डेटा का काम कम करके हैदराबाद की कंपनी मास कम्यूनिकेशंस काे जिम्मेदारी दे दी, जिसने स्मार्ट राज के नाम से काम शुरू किया।
ओसवाल डेटा कंपनी के पास नगर निगम के यूडी टैक्स, हैल्पलाइन, जन्म-मृत्यु, मैरिज सर्टिफिकेट, सामुदायिक भवनाें की बुकिंग आदि का जितना भी डेटा था उसे नई कंपनी काे शिफ्ट किया गया। कुछ कार्य ओसवाल डेटा के पास रहा और कुछ स्मार्ट राज के पास चला गया। इधर, स्मार्ट राज के कार्य काे लेकर मिली शिकायताें के आधार पर 20 मार्च काे राज्य सरकार ने उसका काम बंद कर दिया, लेकिन नई कंपनी काे अभी तक काम नहीं दिया। अब दाे कंपनियां काम कर रही हैं। ऐसे में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के काम ताे धीमी गति से हाे रहे हैं, लेकिन यूडी टैक्स का काम ताे पूरी तरह से ठप ही पड़ गया।
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