(विजय यादव) शहर की 11 बैंक शाखाओं में शोभराज नाम का खाता चैक करिए, इनमें से कुछ खातों में ऐसी एंट्री मिलेगी, जिनमें रोजाना पैसा आता है और तुरंत निकल जाता है। यह पैसा खाता धारक का नहीं बल्कि आपका है। आप हर रोज ऑनलाइन ठगी की बात करते हैं, उसमें से ठगों का एक गिरोह इन खातों को भी ऑपरेट करता है। अब तक कितने लोगों की कितनी राशि जमा है, यह तो जांच के बाद ही पता लग सकता है, परंतु यह तय है कि यह राशि कई लाखों में है।
साठ फुट रोड रामनगर कॉलोनी के रहने वाले खाता धारक का दावा है कि ये उसके नाम से खुले हैं पर इन खातों के पैसों से उसका लेना देना नहीं है। इनमें 3 लोग तौफीक, अरशद खान व सहरुन पैसा जमा करवाते व निकलवाते है। मुझे धोखा देकर ये खाते खुलवाए गए हैं। इसकी जानकारी पुलिस को भी दी गई है। फिलहाल किसी व्यक्ति ने ठगी के बाद क्राइम ब्रांच में मामला दर्ज करवाया तो राज खुलने लगा है।
शोभराज सिंह का कहना है कि कुछ दोस्तों ने किसान क्रेडिट कार्ड पर ज्यादा लोन दिलवाने के नाम पर 9 बैंकों में नए खाते खुलवाए। शाेभराज के दो बैंकों में पहले से बचत खाते थे। इन खातों में से कुछ में आॅनलाइन ठगी के पैसे का लेनदेन हुआ। शोभराज ने अलवर एसपी व एनईबी थाना प्रभारी को इस मामले में शिकायत दी है। इसमें तौफीक, अरशद खान व सहरुन पर झांसा देकर उसके एटीएम कार्ड व पासबुक रखने और बैंक खाते ऑपरेट करने का आरोप लगाया है।
हालांकि पुलिस शोभराज को भी संदिग्ध मान रही है।शोभराज सिंह ने कहा है कि पड़ाेसी युवकाें ने उसे कृषि भूमि पर किसान क्रेडिट कार्ड पर ज्यादा लोन दिलवाने का झांसा देकर बैंकाें में खाते खुलवा लिए। ये लाेग एटीएम व पासबुक के माध्यम से खातों को ऑपरेट कर ऑनलाइन ठगी के जरिए पैसों का लेनदेन कर रहे हैं। ये लाेग अपने शिकार लाेगाें से ऑनलाइन कोड पूछकर व एसएमएस के जरिए लिंक भेजकर उनके खातों से मेरे खातों में पैसा ट्रांसफर करते हैं। सभी खातों की पासबुक व एटीएम इनके पास है।
मेरा बचपन का दोस्त है, ठगी से मेरा लेना देना नहीं : तौफीक
तौफीक का कहना है कि शोभराज उसका बचपन का दोस्त है। जिस जमीन की वह बात कह रहा है, उसका मुझ से सौदा हुआ था। बाद में पता लगा कि जमीन पर किसी दूसरे का कब्जा है। मैंने साढ़े तीन लाख रुपए जो पेशगी दिए थे, वे वापस ले लिए। इसके अलावा उसके घर के पास एक खाली प्लाॅट को लेकर मेरे रिश्तेदारों से उसका विवाद है। इस कारण उसने पुलिस में मेरा नाम लिखाया है। मैंने एनईबी थाने में भी लिखित में दे दिया है। मैंने उसके खातो में किसी तरह का लेनदेन नहीं किया। मेरे अन्य साथियों के बारे में जिनका नाम शोभराज ने पुलिस में लिखवाया है, उनके बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है। पुलिस अपने स्तर पर जांच करके कार्रवाई करे।
11 खातों के एटीएम व पासबुक दूसरों को देना गले नहीं उतरता : पुलिस
शोभराज के परिवाद की जांच कर रहे एनईबी थाने के एएसअाई सुरेश नापा का कहना है कि मामले की जांच जयपुर की साइबर क्राइम सेल कर रही है, इसलिए अलग मुकदमा दर्ज नहीं किया है। साइबर सेल से पुलिस अधिकारी अलवर आए थे, मैं उनके साथ शोभराज के घर गया, लेकिन वह नहीं मिला। नापा का कहना है कि काेई समझदार व्यक्ति अपने 11 बैंक खातों की पासबुक और एटीएम कार्ड दूसरे व्यक्ति को दे दे, यह गले नहीं उतरता। तौफीक थाने आया था, उसने मामले में खुद के संलिप्त होने से मना किया है। अभी मामले की जांच कर रहे हैं।
धमकी : नाम लिया तो अच्छा नहीं होगा
शोभराज का कहना है कि जयपुर साइबर क्राइम ब्रांच की पुलिस आने का पता लगने पर अरशद ने मोबाइल व वाट्सएप से धमकी दी कि अगर उसने पुलिस को नाम लिया तो अच्छा नहीं होगा। वे बार-बार बुला भी रहे हैं।
इन 11 बैंक ब्रांचों में हैं खाते
अग्रसेन सर्किल के पास बैंक ऑफ बडौदा, बसंत विहार स्कीम 3 स्थित बंधन बैंक, रेलवे स्टेशन के पास आंध्रा बैंक, यूआईटी स्थित ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, बर्फखाना रोड स्थित विजया बैंक, रोड नंबर दो स्थित एक्सिस बैंक, विशाल मेगामार्ट के पास यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, दिवाकरी में कोटक महेंद्रा बैंक, लाजपत नगर में इलाहबाद बैंक शाखा में नए खाते खुलवाए। कृषि उपज मंडी स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, मनुमार्ग स्थित पंजाब नेशनल बैंक में पहले से खाते थे। इनमें कुछ बैंक ब्रांचों में ऑनलाइन ठगी का पैसा डालकर निकाला गया। इनमें से दो बैंकों में शोभराज के पहले खाते थे। शेष 9 में नए खोले गए। यदि सभी की जांच होगी तो बड़े मामले सामने आ सकते हैं। जिसमें देशभर के राज खुल सकते हैं।
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