अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ एवं इससे संबद्ध राजस्थान विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का स्वागत किया है। महासंघ के अध्यक्ष प्रोफेसर जे पी सिंघल ने बताया कि नयी नीति भारत केंद्रित होने के साथ-साथ 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षार्थी को वैश्विक नागरिक बनाने की अवधारणा पर आधारित है। पांचवी कक्षा तक अनिवार्य रूप से मातृभाषा में शिक्षा देने तथा यथासंभव आठवीं और उसके पश्चात उच्च शिक्षा तक मातृभाषा में शिक्षा देने को बढ़ावा देने का प्रावधान स्वागत योग्य कदम है। शिक्षा नीति में कला, विज्ञान, शैक्षणिक सहशैक्षणिक, अकादमिक और व्यवसायिक शिक्षा में विभेद समाप्त करने का प्रावधान किया गया है।
शिक्षा की गुणवत्ता के लिए गुणवत्तापरक शिक्षक प्रशिक्षण की महत्ता को रेखांकित करते हुए एकीकृत बीएड डिग्री पाठ्यक्रम की व्यवस्था का महासंघ स्वागत करता है। पारदर्शी आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति की व्यवस्था, शिक्षकों की गरिमा को पुनः बहाल करने तथा शैक्षिक प्रशासन में भागीदारी की व्यवस्था सराहनीय है।
रुक्टा (राष्ट्रीय) के महामंत्री डॉ. नारायण लाल गुप्ता ने कहा कि नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की व्यवस्था सभी क्षेत्रों में शोध को बेहतर ढंग से प्रोत्साहित कर पाएगी ऐसा संगठन का मानना है। शिक्षा के व्यवसायीकरण को रोकने के लिए विभिन्न प्रावधान किए गए हैं। शिक्षा के वित्तपोषण और नीति के कार्यान्वयन को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। महासंघ मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नामकरण शिक्षा मंत्रालय करने का स्वागत करता है।
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