जलदाय विभाग के आला अधिकारियों के कुप्रबंधन के कारण प्रदेश की 450 जलदाय चौकियों व पंप हाउसों से जुड़ी करीब डेढ़ करोड़ आबादी की सुनवाई करने के लिए कोई इंजीनियर नहीं है। विभाग के अधिकारियों ने जेईएन की भर्ती किए बिना ही फील्ड में तैनात जेईएन का प्रमोशन कर एईएन बना दिया और उन्हें पोस्टिंग भी दे दी। पोस्टिंग आदेश में तत्काल रिलीव होने का लिखा होने से सब ने अपना काम छोड़ दिया। ऐसे में फील्ड में काम ठप हो गए।

जलदाय विभाग में कनिष्ठ अभियंता (जेईएन) ही फील्ड में पेयजल सप्लाई व पानी के गुणवत्तापूर्ण के लिए जांच की मॉनिटरिंग करता है। पाइपलाइन डालने, लीकेज सुधारने, नया पंप हाउस बनाने का काम भी देखता है। विभाग में जेईएन की 1150 पोस्ट है, लेकिन 450 पोस्ट खाली है। पिछले दिनों 171 जेईएन को एईएन बनाकर पोस्टिंग दे दी।

इंजीनियरों की यूनियन के पदाधिकारी पिछले दिनों प्रमुख सचिव राजेश यादव से मिलकर यह समस्या बताई थी। लेकिन मामले में कोई प्रोग्रेस नहीं हुई। विभाग के प्रमुख सचिव राजेश यादव ने दलील है कि मामले को दिखवाते है। जलदाय मंत्री बीडी कल्ला का कहना है कि जेईएन से एईएन बने सभी को पोस्टिंग देनी ही थी। जहां पर दिक्कत है, वहां दिखवा रहे है।

आरपीएससी को भेजा हुआ है 150 इंजीनियरों का भर्ती प्रस्ताव
विभाग ने पिछले भाजपा शासन काल में जेईएन की भर्ती एमएनआईटी के जरिए करवाई थी। लेकिन भर्ती पर हुए विवाद और आरोपों के बाद इस बार नए जेईएन की भर्ती पिछले डेढ़ साल से आरपीएससी भर्ती कर रहा है। इसके बाद जलदाय विभाग में दो डीपीसी हो गई है। जेईएन के पद खाली होते गए, लेकिन नई भर्ती नहीं हो सकी। बताया जा रहा है कि विभाग की ओर से मॉनिटरिंग नहीं होने से यह दिक्कत हुई है।



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प्रतीकात्मक फोटो।
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