राजस्थान कांग्रेस में मची सियासी भगदड़ के बीच 33वें दिन रिवर्स गियर लगता दिखा। बगावत पर उतारू पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट दिल्ली से मंगलवार शाम करीब 5:30 बजे अपनों के बीच जयपुर लौट आए। सिविल लाइंस स्थित बंगले पर साथी विधायकों के साथ प्रेस कांफ्रेंस की।
पायलट ने कहा-मैंने अपने लिए कोई पद नहीं मांगा। लेकिन जिन विधायकों ने मेरे साथ रहकर मुद्दे उठाए उन पर सियासी द्वेषता व प्रतिशोध से कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उन्हें पूरा सम्मान मिलना चाहिए। पद आते-जाते रहते हैं। मुझे इनका लालच नहीं है। मेरी राजनीति सत्य व सिद्धांतों पर आधारित है। खुद पर राष्ट्रद्रोह के केस को लेकर वे नाराज नजर आए। पायलट ने पूछा कि पार्टी को लेकर सवाल उठाना कहां का राष्ट्रद्रोह है?
मैं 6 साल से अधिक समय तक पार्टी का अध्यक्ष रहा, संघर्ष किया और जिन लोगों ने उस दौरान संघर्ष किया उनके सम्मान की रक्षा करना मेरा काम है। पायलट सहित अब 19 कांग्रेसी बागी व 3 निर्दलीय भी लौट आए हैं।
हमलों का जवाब दिया
निकम्मा कहे जाने पर : पायलट बोले- गहलोत बड़े हैं। सम्मान करता हूं, लेकिन काम के मुद्दे उठाने का हक है। मुद्दा यह नहीं कि मैं किसी का कितना विरोध करता हूं, लेकिन ऐसी भाषा इस्तेमाल नहीं करता। सार्वजनिक तौर पर बोलते वक्त लक्ष्मण रेखा होनी चाहिए।
पार्टी के विरोध पर: हमने पार्टी की विचारधारा, सरकार और पार्टी लीडरशिप के खिलाफ कभी कुछ नहीं बोला। हमने सिर्फ कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए। मुझे इसका पूरा हक है।
आलाकमान को लेकर : राहुल और प्रियंका ने हमारी आपत्तियां दूर करने के लिए रोडमैप तैयार करने का भरोसा दिया है। हमने जो मुद्दे रखे थे, उनके समाधान के लिए 3 सदस्यों की कमेटी बनाई गई है।
बगावत पर : प्रदेशाध्यक्ष होने के नाते जिम्मेदारी थी कि सरकार बनने के बाद कार्यकर्ताओं को सम्मान दिया जाए। डेढ़ साल से काम की गति धीमी थी। हमें ऐसा लग रहा था कि जनता से किए वादे पूरे नहीं हो रहे हैं।
राजद्रोह के आरोप : जिस तरह राजद्रोह की धारा में नोटिस दिया और 25 दिन बाद वापस लिया, उससे दुख हुआ। हम कोर्ट गए, कई केस हुए। इसे रोका जा सकता था। बदले की राजनीति नहीं हो।
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