यह पहली जन्माष्टमी थी जब मंदिराें में श्रीकृष्ण जन्म के समय श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं लगी। पहली बार काेराेना कंस के कारण कारावास में जन्मे देवकी पुत्र के गाेकुल पहुंचने और नंद घर आनंद पर मंदिराें में उत्साह नहीं दिखा गया। श्रीकृष्णा जन्माभिषेक और दर्शन भक्तों काे ऑनलाइन ही कराए गए। दाे दिन अष्टमी हाेने के कारण कुछेक लाेगाें ने मंगलवार काे भी जन्माष्टमी मनाई लेकिन अधिकांश लाेग बुधवार काे कृष्ण जन्म पर आनंदित नजर आए।

काेराेना संक्रमण के कारण सरकार की निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार इस बार मंदिराें में सादगीपूर्ण तरीके से जन्माष्टमी मनाई गई। लाेगाें ने घर-घर में कान्हा काे बिठाया और उन्हें सुंदर वस्त्र पहनकर पूजा अर्चना की। भाेग लगाकर घर में ही प्रसाद ग्रहण किया। साेमनाथ मंदिर में पुजारी दीपक रावल के नेतृत्व में पूजा अर्चना की गई।


एक दिन में 3 शाेभायात्रा, इस बार सड़कें सूनी ही रही

जन्माष्टमी के दिन शहर के अंदर उम्मेद मिल प्रबंधन व श्रीगीता संघ, मिल क्षेत्र में विश्व हिंदू परिषद व राेटरी क्लब से देववंशी मालवीय लाैहार संघ की अाेर से शाेभायात्रा निकाली जाती है। हर शाेभायात्रा लगभग अाधे से एक किमी तक लंबी हाेती है। पूरा शहर कृष्णमय हाे जाता है। लेकिन इस बार मार्ग सुने नजर आए। जगह-जगह गाेविंदाओं द्वारा फाेड़ी जाने वाली मटकियां भी नजर नहीं आई।

हर बार परिवार के साथ, इस बार अकेले ही, ऑनलाइन कराए दर्शन
गीता मंदिर, साेमनाथ मंदिर सहित कई मंदिराें में रात 10 बजे भीड़ लगना शुरू हाे जाती है। लाेग जन्माेत्सव तक वही रहते है इसके बाद प्रसाद लेकर ही घर काे जाते है। लेकिन इस बार श्रद्धालु कम ही नजर आए। गीता मंदिर आए नरेश भाई रामनानी व सुमित चिंतामणी ने बताया कि हर बार परिवार के साथ आते है लेकिन इस बार अकेले ही आए है। घर पर कान्हा काे बिठाकर पूजा कर रहे है बाकी परिजन। गीता मंदिर और अन्य मंदिराें के दर्शन उनकाे वीडियाे काॅलिंग के जरिए ही करवा दिए है।

बड़ा रामद्वारा में फाेड़ी काेराेना मटकी, संत ने कहा- काेराेना काे भगाएंगे
बड़ा रामद्वारा संत सुरजनदास महाराज के सानिध्य में कृष्ण द्वारा काेराेना की मटकी फाेड़ी गई। कार्यक्रम छाेटे स्तर पर था लेकिन उत्साह पहले जैसा ही देखा गया। कृष्ण प्राकट्योत्सव पर गाेरस का प्रसाद बांटा गया। इस माैके पर संत सुरजनदास ने कहा कि क कंस, क से काेराेना और इन्हें मारने वाला क से कृष्ण ही हाेगा।

जन्माष्टमी के बाद काेराेना दुनिया से जल्द खत्म हाेगा। इस माैके पर निर्मल सेवा संस्थान के सोहनलाल बिड़ला, पीराराम गोदारा, मोहनलाल गुर्जर, प्रेमकिशन तोषनीवाल, राधेश्याम राठी, प्रदीप कच्छवाह, रामेश्वर गोदारा, नरेश सिंधी, भगवानाराम पटेल, रामकन्या लोहिया, मधु तोषनीवाल आदि माैजूद रहे

कोरोनाकाल में राेग प्रतिराेधक क्षमता बढ़ाने वाला प्रसाद बांटा

श्रीमाली समाज ने कृष्ण विग्रह सांवरिया का जन्माेत्सव मनाया। पूरे दिन उल्लास का माहाैल रहा। भक्ताें काे सूखे प्रसाद मंजरी व अजवाइन वितरित किया गया। समाज अध्यक्ष एडवाेकेट पीएम जोशी ने बताया कि कोरोना काल में इम्युनिटी बूस्टर एवं रोग प्रतिरोधक एंटीबायोटिक का कार्य करने वाले शास्त्रीय प्रसाद की अजवाइन, गौंद, सौंठ, केसर आदि से विशिष्ट रूप से सूखे प्रसाद के रूप में तैयार कर मेवों से परिपूर्ण किया गया।

जन्माष्टमी का प्रसाद इस काल के लिए महान औषधी के रूप में है। उपाध्यक्ष रविशंकर दवे ने बताया कि कमलकांत व्यास के सहयोग से वैदिक रीति से आचार्य कृष्णकांत मिश्रा द्वारा 11.30 बजे रात्रि पूजन प्रारंभ करते हुए प्रथम पूज्य गणेश का आह्वान किया। ठीक 12 बजे रात्रि भगवान का जन्म होते ही ‘नंद के आनंद भयो’ के घोष से मंदिर परिसर गुंजायमान रहा।

कान्हा के जन्म के पश्चात पंचामृत से अभिषेक एवं शुद्वोदक स्नान के बाद भगवान काे पालने में झुलाया गया। स्थापित मूर्ति सांवरिया सेठ को नवीन वस्त्रों, स्वर्ण मुकूट, रत्न जड़ित कंठी, मोतियों की स्वर्ण माला से अलंकृत किया गया।

इस माैके पर अनिता त्रिवेदी, मोनिका जोशी, संगीता त्रिवेदी, रूपा मिश्रा, शकुंतला, अदिति, कोषाध्यक्ष राकेश दवे, सांस्कृतिक मंत्री राजेश त्रिवेदी, उपाध्यक्ष सत्यनारायण ओझा, सांस्कृतिक मंत्री अभिषेक, सिद्धार्थ ओझा, पुनीत त्रिवेदी, हरीश एस. दवे, हर्षित त्रिवेदी आदि उपस्थित रहे।



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