महाराष्ट्र की तर्ज पर अब राजस्थान में भी सभी विश्वविद्यालयों में एक समान एक्ट लागू करने की कवायद हो रही है। प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में अंब्रेला एक्ट लागू कर एकसाथ जोड़ने की योजना है। इसके लिए सभी विश्वविद्यालयों की जरूरतों व खासियतों को ध्यान में रखकर एक्ट में शामिल किया गया है और अब इसे विधानसभा में रखकर पास कराना है। विधानसभा पास होने पर यह प्रदेश के सभी विवि पर लागू हो जाएगा।

वर्तमान में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में अलग-अलग एक्ट और प्रावधान हैं। इस वजह से सरकार के किन्हीं नियमों को लागू करने में कई बार परेशानी आ जाती है। कारण कि हर विश्वविद्यालय ने अपनी सुविधानुसार एक्ट में संशोधन किए हैं। कहीं पीएचडी के कुछ नियम हैं तो कहीं पर कुछ। शिक्षकों की पदोन्नति से जुड़े नियम भी अलग-अलग हैं। ऐसे में सरकार के निर्णयों को हर विश्वविद्यालय पर समान रूप से लागू करवाने में परेशानी आती है। लंबे समय से राजस्थान में अंब्रेला एक्ट लागू करने की कवायद शुरू हुई थी।

इस वर्ष के प्रारंभ से इस पर काम शुरू हुआ और अब तक कई बैठकों में एक्ट को लेकर काफी हद तक सहमति भी बन चुकी है। जेएनवीयू कुलपति प्रो. पीसी त्रिवेदी ने बताया कि सरकार के निर्देश पर पूरे प्रदेश के सभी विवि में एकरूपता रखने के लिए अंब्रेला एक्ट बना रहे हैं। इसके लिए बैठक हो चुकी है। जल्द ही पूरी रिपोर्ट बनाकर सरकार के समक्ष रखेंगे, ताकि वह इसे विधानसभा में रखकर आगे की कार्रवाई कर सके।

सरकार ने बनाई थी कमेटी
अंब्रेला एक्ट में कौन-कौनसे नियम-कायदे व प्रावधान होने चाहिए, ताकि किसी भी विवि का अहित ना हो। इसके लिए एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी की अध्यक्षता जेएनवीयू कुलपति प्रो. त्रिवेदी कर रहे हैं। इसमें कॉलेज शिक्षा और सरकार से जुड़े कई अहम सदस्य शामिल हैं।

27 विवि को एक छत के नीचे लाने की कोशिश
राजस्थान में जयपुर का राजस्थान विवि, जोधपुर के जेएनवीयू, अजमेर के दयानंद सरस्वती, उदयपुर के सुखाड़िया विवि और कोटा के खुला विवि और बीकानेर, अलवर सहित कुल 27 विश्वविद्यालय हैं। सब में अलग-अलग एक्ट हैं। इन सभी को एक छत के नीचे लाने के लिए यह प्रक्रिया की जा रही है।



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