सांगानेर की रंगाई-छपाई की फैक्ट्रियों के लिए बगरू-छितरौली औद्योगिक क्षेत्र के नजदीक आरक्षित जमीन को खुले बाजार में नीलाम करने की मंजूरी देने से जुड़े मामले में शुक्रवार को पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड ने माना कि सांगानेर की रंगाई-छपाई फैक्ट्रियां बोर्ड की बिना मंजूरी के चल रही हैं। साथ ही कहा कि बोर्ड ने फैक्ट्री संचालकों को क्लोजर का नोटिस जारी कर रखा है। इस पर हाईकोर्ट ने बोर्ड से पूछा कि जब बोर्ड की मंजूरी नहीं है तो फिर क्षेत्र में फैक्ट्रियां कैसे चल रही हैं।
वहीं, अदालत ने इस मामले में बोर्ड व रीको से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगते हुए पीएन मैंदोला की याचिका व मुख्य सचिव राजीव स्वरूप सहित सात अन्य अफसराें के खिलाफ दायर अवमानना याचिका को भी इस मामले के साथ सूचीबद्द कर एक सितंबर को सुनवाई तय की। सीजे इन्द्रजीत महान्ति व जस्टिस एसके शर्मा की खंडपीठ ने यह अंतरिम निर्देश को अधिवक्ता विजय सिंह पूनिया की याचिका में रीको के प्रार्थना पत्र पर दिया।
बोर्ड की बिना मंजूरी फैक्ट्रियां चल कैसे रही हैं
रीको ने हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर कर बगरू-छितरौली औद्योगिक क्षेत्र के नजदीक सांगानेर की रंगाई-छपाई की फैक्ट्रियों के लिए आरक्षित जमीन को खुले बाजार में नीलाम करने की मंजूरी मांगी थी और 2007 के 3 मार्च व 18 अगस्त के आदेश को संशोधित करने का आग्रह किया है।
रीको की ओर से एजी एमएस सिंघवी ने कहा कि उनके प्रार्थना पत्र को स्वीकार किया जाए। इसके विरोध में प्रार्थी के अधिवक्ता विमल चौधरी ने कहा कि 17 साल पहले दिए गए निर्णय को एक प्रार्थना पत्र से बदला नहीं जा सकता। यदि सांगानेर के रंगाई-छपाई वाले लोग छितरौली क्षेत्र में नहीं जाना चाहते हैं तो वे इंडस्ट्री को बंद कर दें।
अदालत ने कहा कि ये लोग नई जगह नहीं जाना चाहते तो उसे बेच दो। वहीं बोर्ड से फैक्ट्रियों को मंजूरी देने के बारे में पूछा, बोर्ड ने कहा कि उन्होंने मंजूरी नहीं दी है तो अदालत ने कहा कि बोर्ड की बिना मंजूरी फैक्ट्रियां चल कैसे रही हैं।
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