ट्रेनों में आरामदायक सफर की सुविधा देने की कवायद में महिलाओं व दिव्यांगों को मिलने वाली अलग कोच की सुविधा बंद हो गई थी। अब एलएचबी रैक से चलने वाली ऐसी ट्रेनों के लिए एक अलग से कोच तैयार कर लिया गया है, जिसे ट्रेनों में जोड़ा जा रहा है। रेलवे आने वाले दिनों में अधिकांश ट्रेनों को एलएचबी रैक से ही चलाएगा। इस कोच की दरकार ज्यादा थी।

पहले रेलवे इंटीग्रेटेड कोच फैक्ट्री से बने पारंपरिक कोच से ट्रेनें चला रहा था। इन ट्रेनों में गार्ड, लगेज पार्सल के कोच में कुछ हिस्सा महिलाओं व िदव्यांगों के लिए बनाया गया था। जब लिंक ऑफ मैन बुश (एलएचबी) रैक वाली ट्रेनों की संख्या बढ़ाई तो पॉवर कार के कारण दिव्यांग व महिलाओं की सुविधा हट गई थी।

अनारक्षित टिकट पर यात्रा करने वाले इन दोनों श्रेणी के यात्रियों को इन ट्रेनों में सफर करना मुश्किल हो रहा था। दिव्यांग व महिलाओं लिए इन ट्रेनों में लग सकने वाले विशेष कोच तैयार कर लिए हैं। इन कोच में दिव्यांग यात्रियों के बैठने के अनुकूल छह सीटें लगाई गई हैं।

शौचालय की डिजाइन में भी बदलाव किया गया है, ताकि इस विशेष श्रेणी के यात्री सहूलियत के साथ सफर कर सकें। शौचालय व कोच के दरवाजे भी दूसरे कोच से बड़े रखे गए हैं। कोच के एक हिस्से में सामान्य यात्रियों के लिए 30 अनारक्षित श्रेणी की सीटें रखी गई हैं। कोच का एक हिस्सा महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगा। इसमें पार्सल यान भी होगा।

ट्रेन का गार्ड रख सकेगा ध्यान
रेलवे की ओर से बनाए गए विशेष कोच में गार्ड का केबिन भी है। गार्ड के हिस्से वाली जगह में भी बदलाव किए गए हैं। वह िदव्यांग, महिला यात्रियों के साथ पार्सल के लदान का भी ख्याल रखेगा। कोच के ठीक बीच में हैंड ब्रेक लगाया गया है ताकि आपात स्थिति में ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक सकें। कोच में दोनों ओर फिक्स कुर्सी लगाई गई है ताकि ट्रेन के दोनों साइड आने वाले स्टेशनों से सिग्नल का आदान प्रदान कर सकें। एसी की सुविधा नहीं हैं, लेकिन दोनों साइड में पंखे लगाए गए हैं।



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Now Divyang and women will get their coaches in LHB trains
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