प्रदेश की सरकारी बिजली उत्पादन कंपनी व पावर प्लांटों में फाइलों को ऑनलाइन व ई-फाईल करने के लिए इंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) सिस्टम के टेंडर व वर्कऑर्डर में बड़ी अनियमितता सामने आई है। विद्युत उत्पादन निगम ने ईआरपी का वर्कऑर्डर टेंडर की अनुमानित लागत से दुगनी रेट 114.48 करोड़ रुपए में हैदराबाद की एक कंपनी को दे दिया। ईआरपी मामले, टेंडर प्रक्रिया व वर्कऑर्डर में अनियमितता को लेकर ऊर्जा विभाग में शिकायतें हुई।
ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव अजिताभ शर्मा ने उत्पादन कंपनी के अधिकारियों से जवाब-तलाब किया तो वर्कऑर्डर ही निरस्त कर दिया। अब विद्युत उत्पादन निगम की बोर्ड मीटिंग में ईआरपी की मंजूरी, टेंडर लगाने व वर्कऑर्डर देने के मामलों को लेकर सवाल उठ रहे है। उत्पादन बिजली कंपनी के सीएमडी पी. रमेश है।
दो साल से टेंडर प्रक्रिया, फिर दस गुना ज्यादा रेट पर वर्कऑर्डर
बिजली उत्पादन कंपनी में ईआरपी काम के लिए पहली बार सितंबर 2018 में 14.2 करोड़ की अनुमानित लागत का टेंडर जारी किया, लेकिन जून 2019 में इसे निरस्त कर दिया। सॉफ्टवेयर व हार्डवेयर को शामिल करते हुए जुलाई 2019 में 50.68 करोड़ का टेंडर किया। इस टेंडर को भी नवंबर 2019 में बिना कारण ही कैंसिल कर दिया।
इसके बाद दिसंबर 2019 में ईआरपी के नाम पर 50.68 करोड़ की अनुमानित लागत मानते हुए टेंडर लगाया और प्रक्रिया के बाद हैदराबाद की मैसर्स कैल्ट्रोन टैक्सोल्यूशन लिं. को 114.68 करोड़ में वर्कऑर्डर दे दिया। यह टेंडर अनुमानित लागत से दो गुनी से अधिक रेट पर दिया गया।
इसमें आरटीपीपी एक्ट का उल्लंघन किया। इतना ही नहीं बल्कि भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने इस मामले की शिकायत सीएम से लेकर पीएम तक की। इसके बाद 31 अगस्त को बोर्ड मीटिंग की एटीआर में ईआरपी कॉन्ट्रेक्ट को निरस्त कर दिया।
यह तथ्य रहे जिसके कारण मजबूरी में वर्कऑर्डर कैंसिल करना पड़ा
- उत्पादन कंपनी ने टेंडर बोर्ड की सितंबर 2009 में हुई 155वीं बैठक में हुए निर्णय पर ईआरपी के टेंडर लगाए। निर्णय व टेंडर लगाने में 11 साल का अंतर है।
- नियमानुसार 25 लाख से ज्यादा के आईटी व ई गवर्नेंस काम सरकार के डीओआईटी से करवाया जाना चाहिए या एनओसी जरूरी है, लेकिन डीओआईटी से काम नहीं करवाया। आरोप है कि खुली निविदा से पहले डीओआईटी की एनओसी भी नहीं ली गई।
- बिजली कंपनियों में आईटी काम के लिए प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में प्रोजेक्ट ई गवर्नेंस मिशन टीम का गठन किया हुआ है। आरोप है कि उत्पादन बिजली कंपनी ने ईआरपी काम के लिए इस टीम से भी अनुमति नहीं ली।
- ईआरपी के टेंडर प्रोसेस में कुछ कमी रह गई थी। इस कारण वर्कऑर्डर को निरस्त कर दिया। अब दुबारा से प्रक्रिया होगी। ईआरपी में फाइलों को काम ऑनलाइन होगा। - डीपी वर्मा, चीफ इंजीनियर राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम
- बिजली कंपनियों के टेंडर व अन्य प्रकरणों की फाइलें हमारे दफ्तर तक नहीं आती है। मेरे पास कोई शिकायत भी नहीं आई है। शिकायत आने पर पूरे मामले की जांच करवाने के बाद करवाई की जाएगी। - बीडी कल्ला, ऊर्जा मंत्री
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