इस साल 17 अक्टूबर से दुर्गा पूजा की शुरुआत हाेगी। विजयादशमी 26 अक्टूबर काे है। हर साल पितृपक्ष समापन के अगले दिन से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हाेती है, लेकिन इस बार श्राद्ध पक्ष समाप्त हाेते ही अश्विन अधिक मास लगने वाला है। मलमास लगने से नवरात्र व पितृपक्ष के बीच एक महीने का अंतर आ जाएगा। पंडित संजय आचार्य ने बताया कि 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक अधिक मास रहेगा। 17 से 31 अक्टूबर तक शुद्ध अश्विन मास हाेगा। इस दाैरान ही 17 से 26 अक्टूबर तक मां दुर्गा की पूजा की जाएगी।
पितृपक्ष 17 सितंबर तक शुद्ध अश्विन मास से चलेंगा। उसके 30 दिन बाद मां दुर्गा की पूजा हाेगी। पंडित संजय आचार्य ने बताया कि भारतीय ज्योतिष सिद्धांत के अनुसार चलता है। अधिक मास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जाे 32 माह 16 दिन 8 घंटे के अंतर से मलमास का निर्माण हाेता है।
सूर्य वर्ष 365 दिन 6 घंटे का हाेता है तथा चंद्र वर्ष 354 का माना जाता है। दाेनाें वर्षों के बीच करीब 11 दिन का अंतर हाेता है। यह अंतर हर 3 वर्ष में करीब एक माह के बराबर हाे जाता है। इसी अंतर काे दूर करने के लिए हर 3 साल में एक चंद्र मास अतिरिक्त अाता है, जिसे अतिरिक्त हाेने की वजह से अधिक मास का नाम दिया गया है।
165 साल बाद बना ऐसा विशेष संयाेग
अश्विन मास में मलमास लगना और एक महीने के अंतर पद दुर्गा पूजा का यह संयोग करीब 165 साल बाद बनने जा रहा है। ज्योतिष में बताया जाता है कि लीप वर्ष हाेने के कारण ऐसा है, चातुर्मास जाे हमेशा 4 महीने का हाेता है, इस बार 5 महीने का हाेगा। ज्योतिष की माने ताे 165 साल बाद लीप ईयर ओर अधिक मास दाेनाें ही एक साथ है। चातुर्मास लगने से मांगलिक कार्य नहीं हाेंगे। इस दाैरान देव जाे जाते हैं, जाे देवउठनी एकादशी पर जागृत हाेते हैं।
मलमास में कृष्ण भक्ति का विशेष महत्व
मलमास काे महाभारत काल से भी जाेड़ा गया है। जहां पर भगवान कृष्ण ने मलमास का निर्माण किया था। इसके कारण सनातन धर्म के लाेग इसे पवित्र मास मानते है। इसमें किए जप, तप अाैर पूजन का ज्यादा महत्व है। भगवान कृष्ण की पूरे एक माह पूजन किया जाता है। इसके अलावा इस माह में श्रीमद् भागवत कथा सुनने का विशेष महत्व है। जिससे मोक्ष की प्राप्ति हाेती है।
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