चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण क्षेत्र में गुणवत्ता पूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए हैं। इनको वेलनेस सेंटर के रुप में तैयार किया है। आदर्श प्राथमिक अस्पताल की मई माह की रैंकिंग में डूंगरपुर जिला 27 वें स्थान पर रहा। वहीं भीलूड़ा पीएचसी पहले स्थान पर रही है।
वहीं बांसवाड़ा जिला 13 वें स्थान पर रहा। सल्लोपाट बेस्ट पीएचसी के रुप में सामने आई। इससे पहले फरवरी माह की रिपोर्ट में डूंगरपुर 24 वें व बांसवाड़ा 18 वें स्थान पर था। इससे पहले जनवरी में 28 वें स्थान पर था।
देखा जाए तो डूंगरपुर जिला आदर्श अस्पताल के मामले में बाडमेर, दौसा, जालोर, अलवर, झुझुनूं, करौली जिले से आगे हैं, लेकिन समन्वित प्रयासों से और बेहतर स्थिति में आ सकते हैं। बताया जा रहा है कि आदर्श अस्पताल के लिए चिकित्सा विभाग के अधिकारी लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। जहां पर परफार्मेंस अच्छी नहीं है। निगरानी के साथ हिदायत भी जा रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के कुछ अस्पतालों की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है।
शिशोद में 48 प्रसव, दस पीएचसी में एक भी प्रसव नहीं
भीलूड़ा में 21, पोहरी खातुरात में 15, रामगढ़ में 20, शिशोद में 48, धम्बोला में 43, टामटिया में 18, रामगढ़ में 18, बनकोड़ा में 16, वस्सी में तीन, मेवाड़ा में 2, जसैला में 17, गरियता में तीन, कनबा में तीन, चितरी में चार, मेताली में 0, मांडव में 2, कुआं में 9, पुनाली में तीन, फलोज में दो, आंतरी, चारवाड़ा में एक-एक प्रसव हुए हैं। वहीं पीठ, माल, पाड़वा, बिलियाबड़गामा, पिंडावल, साबली, सुराता, भेखरेड़, तलैया, क्षिरेश्वर में में 0—0 प्रसव हुए है।
भीलूड़ा की ओपीडी सर्वाधिक, तलैया में सबसे कम
भीलूड़ा में 96, पोहरी खातुरात में 50, रामगढ़ में 76, शिशोद में 36, धम्बोला में 40, टामटिया में 38, रामगढ़ में 76, शिशोद में 36, बनकोड़ा में 81, वस्सी में 23, मेवाड़ा में 51, जसैला में 60, गरियता में 69, कनबा में 42, चितरी में 37, मेताली में 40, मांडव में 53, पाड़वा में 42, फलोज में 31, बिलिया बडगामा में 31, कुआं में 30, पुनाली में 53, पिंडावल में 47, साबली में 21, सुराता में 20, पीठ में 52, भेखरेड़ में 31, तलैया में 2, क्षिरेश्वर में 9, आंतरी में 21, चारवाड़ा में 22, माल मे 53 ओपीडी रही।
पीठ में मई में एक भी प्रसव नहीं: पीठ कस्बा क्षेत्र का बड़ा कस्बा है। एक दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों से कनेक्ट में है। इस वजह से यहां पर मरीजों का आना जाना लगा रहता है। यहां पर गर्भवती महिला भी है। इसके बाद भी मई माह में एक भी गर्भवती का प्रसव नहीं होना का आंकड़ा चौंकाने वाला है, जबकि फरवरी माह में 39 व जनवरी माह में 37 प्रसव हुए है। कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन होने से पहले सीएमएचओ ने पीठ अस्पताल का निरीक्षण कर डॉक्टर को प्रसव कराने की हिदायत दी थी, इस पर जनवरी व फरवरी में प्रसव का आंकड़ा बढ़ा था।
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