आरपीएससी की ओर से एसीएफ/ एफआरओ एग्जाम 20 सितम्बर से 27 सितम्बर तक संभाग मुख्यालयों पर होगा। कोरोनाकाल में जहां लोग घरों से बाहर निकलने में ही हिचक रहे हैं, वहीं हजारों अभ्यर्थियों को परीक्षा देने के लिए अपने जिले से संभाग मुख्यालय जाना होगा। सेहत के अलावा मामले का आर्थिक पक्ष भी है।
निम्न व मध्यम वर्गीय अभ्यर्थियों को आठ दिन तक होटलों में ठहरना पड़ेगा। उच्च शिक्षा मंत्री भंवरसिंह भाटी ने गत दिनों यूजीसी को कॉलेज व यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं आयोजित नहीं करवाने के लिए पत्र लिखा था। जबकि वे अपने राज्य में प्री-डीएलएड परीक्षा आयोजित करवा रहे हैं। इससे पहले आरबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं भी हो चुकी हैं।
प्रदेश के 1.20 लाख अभ्यर्थी उक्त परीक्षा को आगे खिसकाने की मांग को लेकर आरपीएससी चैयरमैन, मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षामंत्री को पत्र लिख चुके हैं। आरपीएससी की एसीएफ/ एफआरओ एग्जाम प्रदेश के सभी संभाग मुख्यालयों पर आयोजित करवाई जा रही है। ऐसे में अभ्यर्थियों को राज्य के दूर-दराज के जिलों से संभाग मुख्यालयों पर पहुंचने में भी भारी परेशानी होगी।
कोरोना वैश्विक महामारी के चलते किसान व श्रमिक परिवारों की आर्थिक हालत बहुत ज्यादा खराब है। ऐसे में यह परीक्षा करवाने पर अभ्यर्थी अधिक खर्चा वहन नहीं कर पाएंगे। अभ्यर्थी परीक्षा को आगे खिसकाने के लिए ट्वीटर, फेसबुक सहित सोशल साइट्स का सहारा ले रहे हैं। इसके साथ ही मंत्रियों व विधायकों को भी पत्र लिख रहे हैं।
ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं होने से अभ्यर्थियों को निजी वाहन से जाना पड़ेगाट्रांसपोर्ट, ट्रेनें और बसें नहीं चलने के चलते संभाग मुख्यालयों पर आयोजित होने वाली उक्त परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों को पहुंचने में भी भारी परेशानी होगी। अभ्यर्थी किराए पर वाहन लेकर जाएंगे तो उन्हें काफी पैसा खर्च करना पड़ेगा। ऐसे में उक्त परीक्षा में बहुत कम अभ्यर्थी ही बैठ पाएंगे।
हाल ही में आरपीएससी की ओर से आयोजित संस्कृत शिक्षा विभाग की स्कूल लेक्चरर की परीक्षा में 40 प्रतिशत अभ्यर्थी ही उपस्थित हो पाए थे। आरपीएससी की ओर से एसीएफ/ एफआरओ परीक्षा की विज्ञप्ति 9 साल बाद जारी की गई है। कोरोना संक्रमण के चलते इस परीक्षा में ज्यादा अभ्यर्थी शामिल नहीं हो पाएंगे।
ऐसे में अभ्यर्थियों ने मांग की है कि निम्न आयवर्ग के अभ्यर्थियों को ध्यान रखते हुए इस परीक्षा को आगे खिसकाया जाए। जबकि हाईकोर्ट ने पंचायतीराज चुनाव, निकाय चुनावों, मेलों आदि पर रोक लगा रखी है।
संक्रमण का खतरा सबसे अधिक
संक्रमण तेजी से फैल रहा है। जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, बीकानेर, अजमेर, भरतपुर जैसे शहरों में कोरोना बहुत ज्यादा फैला हुआ है। बसों में सफर कर परीक्षा केंद्रों पर पहुंचने और फिर आठ दिन यहां रहकर कोरोनार संक्रमण से बचना अभ्यर्थियों के लिए बड़ी चुनौती होगी। आशंका यह भी है कि अभ्यर्थी संक्रमित हो गए तो यही संक्रमण लेकर वो अपने शहर या गांव पहुंचेंगे।
दूसरे राज्यों के अभ्यर्थी भी होंगे
आरपीएससी की ओर से एसीएफ/ एफआरओ परीक्षा में करीब 1.20 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में बैठेंगे। वहीं अन्य राज्यों के सैकड़ों अभ्यर्थी भी उक्त परीक्षा में बैठेंगे। ऐसे में बड़ा खतरा यह भी है कि वे भी यात्रा के दौरान संक्रमण ला सकते हैं। ऐसे में कोविड-19 संक्रमण से बचना बहुत मुश्किल होगा। कंटेनमेंट जोन बढ़ने के साथ ही इसके साथ ही हर दिन कोरोना से मौतें हो रही है।
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