महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण पर स्टे लगने के बाद राजस्थान में भी पांच प्रतिशत एमबीसी आरक्षण का फायदा ले रही गुर्जर सहित पांच अन्य जातियाें की चिंताएं बढ़ गई है। इस आरक्षण काे 9वीं अनुसूची में जुड़वाने और भर्तियाें में आरक्षण का फायदा दिलाने के मुद्दे पर गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति एकजुट हाे गई है। दाेबारा से आंदाेलन खड़ा करने की तैयारी में है।
इन दाेनाे ही मुद्दाें पर गुर्जराें ने राजस्थान से लेकर दिल्ली तक संसद घेराव की तैयारी कर ली है। संघर्ष समिति के संयाेजक कर्नल किराेड़ी सिंह बैंसला के नेतृत्व में और दिशा-निर्देशाें पर अलग-अलग जिलाें में बैठकें हाे चुकी है। ऐसे में किसी भी समय आंदाेलन की घाेषणा हाे जाएगी।
केंद्र काे 1 माह का अल्टीमेटम, राज्य सरकार काे 15 दिन का
संघर्ष समिति के महामंत्री एडवाेकेट शैलेंद्र सिंह ने कहा कि गुर्जर आरक्षण काे 9वीं अनुसूची में जुड़वाने के मुद्दे पर हमने केंद्र सरकार काे एक महीने का समय दिया है। अल्टीमेटम 12 सितंबर काे जारी किया जा चुका है। हमारी मांग नहीं मानने पर गुर्जर समाज संसद का घेराव करेगा। भर्ती संबंधित बिंदुओं पर राज्य सरकार काे 15 दिन का अल्टीमेटम भी दिया गया था।
मप्र उपचुनाव और राजस्थान के पंचायत चुनाव पर असर
माना जा रहा है कि गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने आंदाेलन खड़ा किया ताे प्रदेश के पंचायत चुनावाें पर निश्चित ताैर पर असर पड़ेगा और कांग्रेस काे नुकसान उठाना पड़ सकता है। मध्यप्रदेश के उप चुनावाें में बीजेपी काे इसका नुकसान हाे सकता है। ऐसा इसलिए क्याेंकि दिल्ली कूच के मुद्दे पर गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति सभी पड़ाेसी जिलाें के गुर्जराें काे वैचारिक रुप से एकजुट करेगी।
राजस्थान में 3 बार खत्म किया जा चुका है गुर्जराें का आरक्षण
प्रदेश में गुर्जर सहित पांच जातियाें का पांच प्रतिशत आरक्षण तीन बार लागू हाेने के बाद खत्म हाे चुका है। प्रदेश में वर्ष 2008 ,2012 और 2016 में गुर्जर सहित पांच जातियाें का आरक्षण खत्म किया गया । इसके बाद राज्य सरकार ने फरवरी 2019 में चाैथी बार आरक्षण दे दिया।
ऐसे में महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण खत्म हाेने के बाद गुर्जराें की चिंताएं बढी हुई है। गाैरतलब है कि राजस्थान में 64% आरक्षण दिया जा रहा है। इसमें ओबीसी काे 21%, एमबीसी 5%, एसटी 12%, एससी 16% और ईडब्ल्यूएस काे 10% का आरक्षण दिया जा रहा है।
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