फ्लैट बेचकर फर्जीवाड़े के मामले में खुलासा हुआ है कि मास्टर माइंड पवन शर्मा और इसके साथियाें ने गिरवी रखी जमीन पर फ्लैट बनाए और उस पर लाखाें रुपए का लाेन भी उठा लिया था। आराेपी फ्लैट खरीदने वालाें काे सीकर अरबन कोआपरेटिव बैंक से पास कराकर लाेन भी दिला देते थे। ऐसे में बैंक अधिकारी व कर्मचारी भी संदेह के घेरे में हैं। सीओ सिटी रामचंद्र मूंड ने बताया कि पवन शर्मा ने कंवरपुरा के राजेंद्र और अख्तर, दासा की ढाणी के राजेश के साथ मिलकर ताेदी नगर में सुदर्शन हाइट के नाम से फ्लैट बनाए।
इन्हाेंने पहले से गिरवी पड़ी जमीन पर फ्लैट बनाकर कई लाेगाें काे बेच दिए और जमीन पर लाेन भी उठा लिया था। सेटबैक के हिसाब से फ्लैट नहीं बने हाेने पर सीज कर दिया गया। लाेन समय पर चुकता नहीं हुआ ताे बैंक ने भवन कुर्क कर अपने लाेन का पैसा जमा कर लिया। भवन कुर्क हुआ ताे फ्लैट खरीदने वालाें ने पवन से पैसे मांगे। इस पर वह छत्तीसगढ़ भाग गया। सीओ सिटी रामचंद्र के अनुसार मामले में आराेपी और अरबन कोआपरेटिव बैंक के अधिकारी व कर्मचारियाें की मिलीभगत का अंदेशा है।
बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक करणाराम, तत्कालीन महाप्रबंधक अंबिकेस, लेखापाल बाबूलाल व अध्यक्ष मक्खनलाल की भूमिका की जांच की जाएगी। क्याेंकि इससे पहले भी बैंक के प्राधिकृत प्रतिनिधि सुरज्ञानी मीणा मामले में रिपाेर्ट दर्ज करा चुका है। फ्लैट बेचने और खरीदने वालाें काे आराेपियाें ने आपस में ही एक दूसरे का गारंटर बना रखा था।
मुकदमे दर्ज हाेने से पहले ही छाेड़ दिया सीकर
जांच अधिकारी एएसआई महेंद्र सिंह के अनुसार आराेपी पवन शर्मा काे शुक्रवार काे काेर्ट में पेश किया जाएगा। पूछताछ में 10वीं पास आराेपी ने बताया कि मुकदमे दर्ज हाेने से पहले ही उसने 2016 में सीकर छाेड़ दिया था। 2017 में मुकदमे दर्ज हुए ताे वह छत्तीसगढ़ चला गया और वहां दुकान पर मजदूरी करने लगा।
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