काेविड- महामारी के दौरान जेएलएन में पिछले सप्ताह से अपनी मांगों काे लेकर दाे घंटे कार्य के बहिष्कार पर चल रहे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की मांगों पर अब तक सुनवाई नहीं हुई। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार का खामियाजा चिकित्सक, रेजीडेंट व नर्सिंग भुगत रहे हैं। साेमवार काे आइसोलेशन वार्ड में भर्ती एक मरीज की उपचार के दौरान माैत हाे गई। वहां अतिरिक्त प्रिंसिपल डाॅ. संजीव माहेश्वरी व रेजीडेंट राउंड ले रहे थे।

इसी दौरान वहां वेंटीलेटर नहीं मिलने से एक मरीज की तबीयत बिगड़ गई। चिकित्सकों ने वहां शव हटाकर दूसरे मरीज काे पलंग पर लेटाने के लिए कहा, लेकिन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही नहीं था। मरीज की तबीयत बिगड़ती देख डाॅ. माहेश्वरी ने रेजीडेंट की मदद से शव काे ट्रॉली पर लेकर वार्ड से बाहर निकाला।

वहां दूसरे मरीज काे वेंटिलेटर पर लेटाया। अतिरिक्त प्रिंसिपल डाॅ. माहेश्वरी ने अपने परिचित काे फाेन कर केबल मंगवाकर वेंटिलेटर चालू कराया। नर्सिंग कर्मचारियों व सीनियर चिकित्सकों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से रसूखदार लाेग फाेन करके पहले उनके मरीजों की जांच करने के साथ ही उन्हें वीआईपी ट्रीटमेंट देने के लिए दबाव बना रहे हैं। अब प्रिंसिपल से हस्तक्षेप की बात तक कही गई है।
90 पद खाली: जेएलएन में 90 से अधिक पद अभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के खाली हैं। एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पास तीन से चार वार्ड का प्रभार है। अब काेविड में ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर जाना आसान नहीं है।
नर्सिग अधीक्षक कक्ष में बनेगा काेविड ओपीडी : अतिरिक्त प्रिंसिपल डाॅ. संजीव माहेश्वरी ने बताया कि जेएलएन के ट्राेमा आईसीयू में बनाए गए काेविड वार्ड के सामने स्थित नर्सिंग अधीक्षक कक्ष सहित हाॅल व अन्य कमरों काे जल्द काेविड ओपीडी बनाया जाएगा। यहां पहले चरण में 300 साै बैड पर प्रशासन काेविड वार्ड बनाने जा रहा है।



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The doctors are shifting with the help of the residents, the bodies are being installed, the oxygen is deteriorated due to the boycott of the fourth class workers in JLN
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