माही काॅलानी के सरकारी आवासाें में अवैध रूप से बाहरी लाेगाें के रहने संबंधी सर्वे की कार्रवाई शनिवार काे एक बार पुन: शुरू हाे गई। भवन एवं बांई मुख्य नहर के एक्सईएन हरिशंकर कुमावत भी टीम के साथ पहुंचे। इस दाैरान कई मकानाें में फर्जी तरीके के बाहरी लाेग किराएदार के रूप में रहते पाए गए। पूछताछ के दाैरान उन्हाेंने बताया कि पूर्व में जिनके नाम यह मकान आवंटित था, उसने उन्हें किराए पर दिया है। टीम में साथ चल रहे विभागीय कार्मिकाें ने रिकार्ड चेक किया ताे उन आवासाें का पिछले कई वर्षाें से किराया बकाया निकला। वहीं, कुछ सरकारी आवास ऐसे पाए गए, जिनमें बाहरी लाेगाें ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा था।
ऐसे लाेगाें काे सर्वे टीम के आने की जानकारी मिली ताे वे ताले लगा कर चले गए। ऐसे मकानाें पर सर्वे टीम ने अपने ताले लगा दिए। इनके अलावा जिन आवासाें में सरकारी कर्मचारी व अधिकारी निवास कर रहे थे, लेकिन पिछले कई सालाें से उनका किराया बाकी था। उनका भी रिकार्ड खंगाला गया। उनमें भी अधिकांश लाेग ऐसे थे, जाे सरकार से किराया भत्ता उठा रहे थे, लेकिन माही के सरकारी आवासाें में रह रहे थे। इन आवासाें के किराए की राशि भी माही में जमा नहीं करा रहे थे। ऐसे लाेगाें काे अंतिम चेतावनी देते हुए शीघ्र किराया राशि जमा कराने काे कहा गया। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय व कानूनी कार्रवाई भी शुरू की गई।
35 लाख की बकाया वसूली की थी
माही काॅलाेनी में 370 सरकारी क्वार्टर हैं, जिनमें से करीब 70 नाकारा घाेषित किए जा चुके हैं। तीन साै क्वार्टर में लाेग रह रहे हैं। शनिवार तक इनमें से करीब डेढ़ साै क्वार्टर के सर्वे का कार्य पूर्ण हाे चुका है। करीब 40 मकानाें में बाहरी लाेग फर्जी तरीके से रहते पाए गए। वहीं कई सरकारी कर्मचारी व अधिकारी ऐसे थे, जिनका वे सरकार से किराया भत्ता भी प्राप्त कर रहे थे, लेकिन माही में किराया राशि जमा नहीं करा रहे थे। शनिवार तक इनसे 35 लाख रुपए की राशि वसूली जा चुकी थी।
किराया नहीं भरने पर मूल आवंटी व किराएदार के खिलाफ रिपाेर्ट
माही के सरकारी आवासों काे अवैध रूप से किराए पर देने व किराया राशि जमा नहीं कराने के मामले में पुलिस में एफआईआर कराने के लिए शिकायत दी है। माही काॅलाेनी के इंचार्ज जूनियर इंजीनियर जगदीश कटारा ने काेतवाली में मूल आवंटी धीरा मीणा व किराएदार वासुदेव पारगी के खिलाफ गबन की यह रिपाेर्ट दी। रिपाेर्ट में बताया गया है कि माही के बांध खंड प्रथम के बेलदार धीरा काे क्वार्टर नंबर 5.148 आवंटित किया गया था। अगस्त 2016 काे वह सेवानिवृत्त हाे गया।
सेवानिवृत्ति के बाद उसने अपने नाम आवंटित क्वार्टर अवैध रूप से वासुदेव पारगी, कनिष्ठ लिपिक, पंचायत समिति, बांसवाड़ा काे किराए पर दे दिया। इन दाेनाें ने पिछले चार साल की किराया राशि मय ब्याज 2 लाख 18 हजार रुपए आज दिन तक जमा नहीं कराई। वासुदेव पारगी बिना किराया राशि जमा कराए क्वार्टर खाली कर चले गए, जबकि इस संदर्भ में माही विभाग ने विकास अधिकारी, पंचायत समिति, बांसवाड़ा काे भी पत्र क्रमांक 326 दिनांक 24 फरवरी 2020 काे सूचित कर दिया गया था।
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