प्रदेश में मंगलवार काे 2121 नए संक्रमित मिले और 15 रोगियों की मौत हो गई। लेकिन मंगलवार प्रदेश के लिए कुछ शुभ आंकड़े भी लेकर आया। इस दौरान सोमवार को मिले 2165 मरीजों से 44 कम केस सामने आए हैं। बीते 4 दिन में तीसरी बार प्रदेश में पिछले दिन से कम रोगी सामने आए हैं। इससे पहले लगातार 25 दिन ऐसे थे जब पिछले दिन से ज्यादा केस मिले हों।

यही नहीं, पिछले 24 घंटे में 2027 रोगी ठीक भी हुए। अब तक 1,25,448 रिकवर हो चुके हैं। यानी रिकवरी रेट 84.34% पहुंच गई है। हालांकि, इन्हीं आंकड़ों के बीच सावधान होने की भी जरूरत है। पिछले 12 दिन से लगातार रोज 2000 से अधिक संक्रमित सामने आ रहे हैं। संक्रमितों का आंकड़ा भी अब डेढ़ लाख के करीब पहुंचकर 1,48,316 हो गया है। अब तक 1574 की मौत हाे चुकी है। इसलिए वैक्सीन आनेे तक मास्क को ही वैक्सीन मानें।

एक दिन में रिकॉर्ड 2211 केस मिल चुके
25 सितंबर 2010
26 सितंबर 2045
27 सितंबर 2084
28 सितंबर 2112
29 सितंबर 2148
30 सितंबर 2173
1 अक्टूबर 2193
2 अक्टूबर 2211
3 अक्टूबर 2150
4 अक्टूबर 2184
5 अक्टूबर 2165
6 अक्टूबर 2121

  • 17 सितंबर से रोज पिछले दिन से अधिक केस मिल रहे थे। 25 दिन बाद पहली बार 3 अक्टूबर को घटे। इसके बाद 5 और 6 अक्टूबर को भी मरीज घटे।

राहत: 6 दिन में 12 हजार से अधिक रोगी ठीक, नए रोगियों से 791 कम

  • रिकवरी प्रदेश में अब तक 1,25,448 रोगी ठीक हो चुके हैं। पिछले 6 दिन में 12,233 रोगी ठीक हुए। नए रोगी 13,024 ही आए। यानी सिर्फ 791 ज्यादा। इस लिहाज से अक्टूबर के 6 दिन में रिकवरी रेट 93.92% रही।
  • मंगलवार को एक ही दिन में 3 जिलों में 200 से अधिक, जबकि 4 में 100 से अधिक रोगी ठीक हुए। जोधपुर में 247, जयपुर में 215, भीलवाड़ा में 215, अजेमर में 192, उदयपुर में 184, बीकानेर में 163 और सवाई माधोपुर में 111 रिकवर हुए।

चिंता : गुजरात में हमसे कम मरीज, लेकिन डेढ़ गुना ज्यादा टेस्ट हो चुके

  • एक्टिव केस प्रदेश में 21,294 हैं। जयपुर में यही संख्या 9 हजार के करीब 8975 हो गई है। जोधपुर में 4905 एक्टिव केस हैं। जयपुर-जोधपुर ही ऐसे जिले जहां एक्टिव केस 1 हजार से ज्यादा।
  • मौतें नहीं थम रहीं। अब तक 1574 रोगी दम तोड़ चुके। मृत्युदर 1.06% तक गिर गई है लेकिन सच येे भी है कि मौतें किसी दिन नहीं घटी।
  • टेस्टिंग कम हो रही है। अब तक 32.45 लाख ही टेस्ट हुए हैं। हमसे कम मरीजों वाले गुजरात (1.45 लाख रोगी) में 47 लाख टेस्ट हो चुके हैं। बिहार (1.90 लाख रोगी) में 78.9 लाख टेस्ट

इधर, आयुर्वेद-योग से हल्के और गैर लक्षणों वाले मरीजों के इलाज को मंजूरी

  • कोरोना का इलाज आयुर्वेद और योग से भी हो सकता है। मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने हल्के और गैर लक्षणों वाले मरीजों के आयुर्वेद और योग से इलाज को मंजूरी दे दी। गंभीर मामलों में एलोपैथिक इलाज के लिए अस्पताल भेजना अनिवार्य होगा।
  • दो बार गर्म पानी के साथ अश्वगंधा या इसका चूर्ण, 15 दिन तक लें। एक चुटकी हल्दी व नमक को गर्म पानी में डालकर गरारे करें। त्रिफला और यष्टीमधु यानी मुलेठी को पानी में उबालकर उससे गरारे करें।
  • अणु तेल, षडबिन्दु, तिल का तेल या नारियल का तेल की बूंदें नाक में डाली जा सकती हैं। गाय के घी को भी दिन में एक या दो बार नाक में डालना चाहिए, खासकर जब घर से बाहर जाना हो और बाहर से घर लौटे हों। - आधा चम्मच हल्दी 150 एमएल गर्म दूध में डालकर रात में पीना चाहिए। आयुष काढ़ा या क्वाथ दिन में एक बार लेना चाहिए।
  • सोशल डिस्टेंसिंग, साफ-सफाई और हाथों की स्वच्छता के अलावा मास्क पहनना जरूरी है।
  • कोरेाना से बचाव के लिए एक चुटकी हल्दी और नमक को गर्म पानी में डालकर गरारे करें। त्रिफला और यष्टीमधु यानी मुलेठी को पानी में उबालकर उससे गरारे करें।
  • अणु तेल, षडबिन्दु, तिल का तेल या नारियल का तेल की बूंदें नाक में डाली जा सकती हैं। गाय के घी को भी दिन में एक या दो बार नाक में डालना चाहिए, खासकर जब घर से बाहर जाना हो और बाहर से घर लौटे हों।
  • यूकेलिप्टस के तेल, अजवाइन या पुदीने को पानी में डालकर दिन में एक बार भाप लेना चाहिए। कम से कम छह से आठ घंटे की नींद लेनी चाहिए। कसरत करनी चाहिए और योग प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए।
  • आधा चम्मच हल्दी 150 एमएल गर्म दूध में डालकर रात में पीना चाहिए। आयुष काढ़ा या क्वाथ दिन में एक बार लेना चाहिए।
  • इसके तहत अश्वगंधा का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। हल्का व्यायाम भी करें।
  • अश्वगंधा, लौंग, गिलॉय और आयुष-64 जैसी आयुर्वेदिक औषधियां काम आती हैं। यह प्रोटोकॉल न केवल कोरोना के मैनेजमेंट के लिए एक जरूरी कदम है, बल्कि इस पारंपरिक ज्ञान से आधुनिक समय की मेडिकल प्रॉब्लम्स को भी हल किया जा सकता है।


विशेषज्ञों ने तैयार किया प्रोटोकॉल
प्राेटोकाॅल विशेषज्ञों की टीम ने तैयार किया है। इस समिति में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (एआईआईए), इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेनिंग एंड रिसर्च इन आयुर्वेद और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (एनआईए), सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंसेज (सीसीआरएएस), सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन योग एंड नेचुरोपैथी (सीसीआरवायएन) और अन्य राष्ट्रीय अनुसंधान संगठन शामिल है।

  • प्रोटोकॉल में विस्तार से बताया गया है कि मरीजों को कौन-कौन सी आयुर्वेदिक दवाएं कितनी मात्रा में कितनी बार देनी हैं। इसी तरह से मरीजों के लिए योग के जरूरी आसनों के बारे में भी बताया गया है। नीति आयोग के सदस्य और कोरोना पर बनी टास्क फोर्स के प्रमुख डॉ. वीके पॉल के अनुसार, प्रोटोकॉल तैयार हो जाने के बाद देश के सभी आयुर्वेदिक अस्पतालों में कोरोना मरीजों का एक समान प्रामाणिक इलाज सुलभ हो सकेगा।


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फाइल फोटो
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