विधायक कैलाश त्रिवेदी की मंगलवार को मौत हो गई। हालांकि उनकी मौत को कोरोना की वजह से नहीं माना जा रहा है लेकिन हकीकत यह है कि उनके ऑर्गन कोरोना की वजह से ही प्रभावित हुए और फिर रिकवर नहीं हुए। 15 सितम्बर से पहले ही वे कोरोना निगेटिव हो चुके थे।

उसके बाद उन्हें एसएमएस में भर्ती कराया गया था। कोरोना की वजह से लंग्स में इंफेक्शन के कारण उन्हें भर्ती किया गया था और रेस्पाइरेटरी सिस्टम प्रभावित हो गया था। तबीयत अधिक बिगड़ती गई तो 2 अक्टूबर को मेदांता में भर्ती कराया गया था। वहां भी तबीयत खराब होती चली गई।


न केवल विधायक त्रिवेदी बल्कि ऐसी कई शख्सियत दुनिया चली गई, जिन्हें कोरोन पॉजिटिव होने के बाद निगेटिव हुआ लेकिन कोरोना वायरस इंपेक्ट की वजह से उनके अन्य अंग बुरी तरह प्रभावित हुए और उन्हें बचाया नहीं जा सका। आखिर कोरोना निगेटिव के बावजूद लोगों की हो रही मौतें चिंता का कारण बनती जा रही हैं। क्योंकि ऐसे लोगों की संख्या काफी तेजी से बढ़ी है, जिनके कोरोना तो निगेटिव आया लेकिन कुछ दिन पहले कोरोना पॉजिटिव आने की वजह से उनके आर्गन खराब होते चले गए और अन्तत: उनकी मौत हो गई।
एक्सपर्ट्स के साथ भास्कर रिपोर्ट...

डॉ. तोलानी को कोई बीमारी नहीं थी, फिर भी मल्टीपल ऑर्गन फेलियर
डॉ. तोलानी 16 जून को पॉजिटिव आए और 30 जून को निगेटिव आ गए। लेकिन उसके बाद उनके लंग्स में इंफेक्शन हो गया और फिर किडनी और बाद में मल्टीपल आर्गन फेलियर हो गए। जबकि डॉ. तोलानी को पहले से कोई डिजीज नहीं थी। उन्हें 22 जून को फिर एडमिट कराया गया लेकिन 22 जुलाई को डेथ हो गई।
डॉ. गोयल निगेटिव आ चुके थे फिर भी डेथ
एसएमएस के ऑर्थो विभाग के डॉ. पवन गोयल जुलाई में कोविड पॉजिटिव आए। आरयूएचएस में भर्ती किया गया। यहां से ईएचसीसी चले गए। वहां कोविड आईसीयू में निगेटिव आ गए थे, लेकिन 5 सितंबर को उनकी मौत हो गई। वजह-मल्टीपल आर्गन फेलियर। डॉ. गोयल को कोई बीमारी नहीं थी।
विधायक कैलाश सितंबर में निगेटिव, फिर तबीयत बिगड़ती गई, दिल्ली में दम तोड़ा
विधायक कैलाश त्रिवेदी को सितम्बर शुरू में कोरोना हुआ, वे निगेटिव आ गए, लेकिन लंग्स में इंफेक्शन हो चुका था। 15 सितम्बर को उन्हें एसएमएस में भर्ती किया गया। यहां तबीयत बिगड़ती चली गई। परिजन उन्हें मेंदाता ले गए। वहां भी सुधार नहीं हुआ और मल्टीपल आर्गन फेलियर हो गए और छह अक्टूबर को उनकी मौत हो गई।
व्यवसायी की लंग्स इंफेक्शन ने ली जान
भरतपुर रहने वाले ऑयल बिजनेसमैन मदनमोहन गर्ग 10 जुलाई को पॉजिटिव आए और 5 अगस्त को निगेटिव रिपोर्ट आई। लेकिन कुछ ही दिन में तबीयत बगड़ गई और 13 अगस्त को उनकी डेथ हो गई। उनके भाई ने बताया कि लंग्स में हुआ इंफेक्शन सही ही नहीं हो पाया।

ये सिर्फ उदाहरण, आंकड़ा काफी अधिक है लेकिन सरकार गिनती नहीं
ऊपर दिए गए यह महज चार उदाहरण हैं, लेकिन हकीकत यह है कि पिछले 32 दिनों में प्रदेश में 150 से अधिक ऐसे लोगों की मौत हो चुकी हैं, जिनके कोरोना निगेटिव होने के बाद लंग्स इंफेक्शन या अन्य आर्गन प्रभावित हुए और बाद में मल्टीपल आर्गन फेलियर हो गए।

अब चूंकि इन लोगों में कोरोना निगेटिव था तो सरकार इन्हें कोरोना की वजह से मौत नहीं मानती, जबकि डॉक्टर्स का कहना है कि जिन लोगों को कभी कोई बीमारियां ही नहीं हुई, कोरोना होने के बाद वे गंभीर बीमार हो गए, उन्हें नहीं बचाया जा सका। यही सबसे बड़ी चिंता का विषय है।

मौतें क्यों, ये हैं वजह

  • वायरस लंबे समय तक बॉडी में रहकर अंगों को प्रभावित कर रहा है। यानी रिपोर्ट में तो कोरोना निगेटिव आ जाता है लेकिन वायरस बॉडी में रह जाता है और कम इम्युन वाले आॅर्गन को तेजी से प्रभावित करता है।
  • अन्य बीमारियां होती हैं तो कोरोना वायरस की वजह से उनके वायरस भी प्रभावी हो जाते हैं। कोरोना निगेटिव भी आ जाता है तो इम्युन सिस्टम कमजोर होने की वजह से व्यक्ति की तबीयत खराब होती चली जाती है।
  • कुछ लोगों में सैकेंडरी इंफेक्शन होता तो वह भी जानलेवा हो जाता है।

एक्सपर्ट पैनल; डॉ. रमन शर्मा, डॉ. पुनीत सक्सैना, (प्रो. मेडिसिन, एसएमएस अस्पताल), डॉ. प्रवीण मंगलूनिया, फिजिशियन, डॉ. राजेश शर्मा, अधीक्षक, एसएसएस अस्पताल और डॉ. विजय कपूर, सेक्रेट्री, पीएचएनएस।



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फाइल फोटो
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