पर्यटन सीजन शुरू है और पावणे गायब। जो कुछ आ रहे हैं, वो आसपास के प्रदेश और या लोकल टूरिस्ट ही हैं। उनके लिए एक वजह राज्य सरकार की ओर से टिकट दरों में की गई 50% छूट है। लेकिन अब इस छूट के दिन 31 अक्टूबर को पूरे हो रहे हैं। फिलहाल पुरातत्व विभाग या सरकार की ओर से छूट को बरकरार रखने की कोई कसरत दिखाई नहीं पड़ी है।

दूसरी ओर, यही बात पर्यटन से जुड़े लोगों को कुछ बेचैन किए हुए है। उनका मानना है कि जान बचाने के दौर में कोई घूमने का जोखिम उठा रहा है तो उनके स्वागत-सत्कार में सरकार को भी दो कदम बढ़ाने चाहिए। इसके लिए सर्वाधिक जरूरी है टिकट दरों में की गई छूट बरकरार रखी जाए।


दूसरी ओर, सरकार के सामने स्मारकों की मेंटिनेंस जितने पैसे भी खजाने में नहीं आना चिंता का कारण है। इस कशमकश में पर्यटन को उबारने के लिए पर्यटकों को बुलाने की जरूरत है, जिसके लिए नए आकर्षण और छूट एक बड़ा जरिया है। खासकर पूरे सीजन केवल आने वाले लोकल टूरिस्ट के लिए।

प्रदेश में कुल स्मारक और पर्यटकों के हाल

  • 31 किले-महल-म्यूजियम हैं, जहां पुरातत्व विभाग टिकट से एंट्री देता है।
  • 2 से ढाई हजार औसतन टूरिस्ट आ रहे हैं। वीकेंड पर संख्या कुछ बढ़ जाती है।
  • 8 स्मारक जयपुर के हैं, जो कि मुख्य आकर्षण हैं। इन्हीं में दो-तिहाई टूरिस्ट।

तुलना तो देखिएं, कुछ भी तो नहीं बचा

सितंबर 2019-20 3,87000 टूरिस्ट थे।

सितंबर 2020-21 84000 केवल टूरिस्ट

यह आंकड़ा लाख तक भी नहीं पहुंचा।

टिकट दरों में कटौती का मतलब सरकार के लिए रेवेन्यू का बड़ा नुकसान
18 करोड़ की आय टिकटों से होती थी अप्रेल से सितंबर तक के 6 महीनों में
37 लाख तक ही रह गई है अब। मतलब मेंटिनेंस का खर्च भी नहीं। (यही एक वजह है कि टिकट दरें सामान्य की जा सकती हैं)।

सरकार का विचार: हालात देख निर्णय लेने का

  • कोरोना की स्थितियां देखकर ही निर्णय लेंगे। टूरिस्ट के हालात, सरकार की रेवेन्यू के लिहाज से भी सारी स्थितियां देखनी है। - मुग्धा सिन्हा, सचिव, कला एवं संस्कृति

टूरिज्म एक्सपर्ट बोले: बिना टूरिस्ट किसके टिकट काटेंगे, फिलहाल पर्यटकों को आकर्षित करने का चैलेंज

  • सरकार कम से कम दो साल स्मारकों की फीस इसी तरह कम रखें। जब तक बाहर के टूरिस्ट नहीं आ रहे, तब तक इंटर-स्टेट टूरिस्ट को लाने और छूट के प्रोविजन पर काम किया जाना चाहिए। - दौलत सिंह, संरक्षक, फेडरेशन ऑफ टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन
  • पर्यटक है कहां? उनको बुलाने के लिए कुछ तो आकर्षण होना चाहिए। नहीं तो जो है, वो भी नहीं आएंगे। सीजन के महीने शुरू हुए हैं, फेस्टिवल के दौरान लोग बाहर निकलने की सोचेंगे तो छूट के प्रोविजन बेहतर रहेंगे। - संजय कौशिक, टूर ऑपरेटर




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उनके लिए एक वजह राज्य सरकार की ओर से टिकट दरों में की गई 50% छूट है
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