जवाई बांध से सिंचाई के लिए निर्धारित जलराशि से 100 एमसीएफटी पानी कम देने और शर्ते रखने के बाद देने के विरोध में किसानों का शुरू हुआ महापड़ाव गुरुवार को समझौते के बाद समाप्त हो गया। 26 घंटे में 2 वार्ता के बाद प्रशासन ने किसानों की मांग के अनुसार बिना शर्त तय निर्णय के अनुसार 4 पाण के लिए 4 हजार एमसीएफटी पानी बिना शर्त देने की बात पर सहमति दी।
इसके बाद किसानों ने अपना महापड़ाव समाप्त किया। गौरतलब है कि गत 7 अक्टूबर को जवाई बांध के पानी के बंटवारे में संभागीय आयुक्त डॉ. समित शर्मा ने किसानों को सिंचाई के लिए 4 हजार एमसीएफटी पानी देने का निर्णय लिया। बाद में जारी किए गए मिनट्स में किसानों को पहले 3900 एमसीएफटी पानी देने और दिसंबर में अगर जलदाय विभाग के जवाई प्रोजेक्ट से जुड़ने वाले गांव नहीं जोड़ने पर 100 एमसीएफटी पानी देने की शर्त रखी।
गत 18 अक्टूबर संगम अध्यक्षों व जलसंसाधन विभाग के अधिकारियों के बीच पाण निर्धारण की बैठक में 3600 एमसीएफटी पानी ही देने पर किसानों ने बैठक बहिष्कार कर विरोध शुरू किया। एक दिन पूर्व बुधवार को किसानों ने रैली निकालकर कृषि मंडी परिसर में महापड़ाव शुरू किया। दोपहर को 1 घंटे तक चली पहले दौर की वार्ता विफल रहने के बाद किसानों ने मंडी परिसर में रात बिताई।
दूसरे दिन गुरुवार किसानों की संख्या में बढ़ोत्तरी होने के बाद सकते में आए प्रशासन ने दोपहर करीब 12 बजे उपखंड अधिकारी कार्यालय में एडीएम वीरेंद्रसिंह एवं एसडीएम देवेंद्र कुमार की मौजूदगी जल संसाधन विभाग व जल उपभोक्ता संगम अध्यक्षाें की बैठक हुई, जिसमें जल वितरण कमेटी की बैठक में दिए गए पानी काे यथावत देने का निर्णय लिया गया।
इसके बाद एडीएम सिंह ने महापड़ाव स्थल कृषि मंडी परिसर पहुंच 4 हजार एमसीएफटी पानी बिना शर्त देने की घाेषणा की। बाद में किसान संघर्ष समिति के बैनर तले शुरू हुए महापड़ाव को समाप्त करने की घोषणा की गई। इस माैके पर समिति अध्यक्ष जयेंद्रसिंह गलथनी, रघुवीरसिंह बिसलपुर, नरपतसिंह मदेरणा, उमाशंकर मूंदड़ा, भंवरसिंह दुजाना आदि मौजूद थे।
100 एमसीएफटी पानी काे लेकर किसानों और प्रशासन के बीच विवाद था
गत 7 अक्टूबर को संभागीय आयुक्त एवं जल वितरण कमेटी अध्यक्ष डाॅ. समित शर्मा की अध्यक्षता में जल वितरण कमेटी की बैठक वीसी के माध्यम से हुई। जिसमें सर्वसम्मति से जवाई बांध से किसानों को सिंचाई के लिए 4000 एमसीएफटी एवं पेयजल के लिए 2192 एमसीएफटी आरक्षित किया गया था।
लेकिन गत 18 अक्टूबर काे नहर खाेलने के समय व पाण निर्धारित करने काे लेकर जल संसाधन विभाग में आयोजित संगम अध्यक्षों और जल संसाधन विभाग के बैठक में 4000 एमसीएफटी में से 100 एमसीएफटी पानी देने के लिए शर्त जाेड़ने की बात कही गई। जिस पर संगम अध्यक्षाें ने बैठक का बहिष्कार करते हुए मांगे नहीं मानने पर 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन के लिए महापड़ाव के साथ आंदाेलन शुरू किया था।
बुधवार सुबह 10 बजे शुरू हुआ महापड़ाव
बंटवारे की बैठक के अनुसार 4 पाण के लिए 4 हजार में से 3900 एमसीएफटी ही पानी देने को लेकर किसानों बुधवार सुबह 10 बजे कृषि उपज मंडी में महापड़ाव शुरू किया। दोपहर 3 बजे एसडीएम कार्यालय में पहले दौर की वार्ता हुई, जो बेनतीजा रही।
गुरुवार दोपहर 1 बजे किया समाप्त
दूसरे दिन धरना स्थल पर किसानों की संख्या बढ़ने और महापड़ाव तेज करने को लेकर सुबह प्रशासन मौके पर पहुंचा। दोपहर 12 बजे किसानों के साथ बैठक के बाद जवाई से बिना शर्त पूरा पानी देने पर सहमति दी। बाद में दोपहर 1 बजे एडीएम ने धरना स्थल पर किसानों के समक्ष घोषणा करने के बाद महापड़ाव समाप्त हुआ।
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