कपड़ा उद्याेग काे आगे बढाने में जिला प्रशासन हर समय तैयार है। उद्योगपतियों को उद्योग को परिवार की तरह मानना चाहिए। यह बात कलेक्टर शिवप्रसाद एम नकाते ने टेक्सटाइल उद्यमियों के साथ मेवाड़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के संयोजन में आयोजित वर्चुअल मीटिंग में कही। उन्होंने कहा कि रीको एरिया में सड़क, पानी, रोड लाइट विभिन्न समस्याओं को देखने के लिए मैं व्यक्तिगत रूप से जिला अधिकारियों के साथ जल्द रीको एरिया का दौरा करुंगा। ग्रोथ सेंटर में चंबल परियोजना से पेयजल उपलब्ध कराने के लिए रीको के पास 30 लाख रुपए की स्वीकृति आ गई है और जल्द चंबल का पानी ग्रोथ सेंटर में मिलेगा।

बिलिया, रीको क्षेत्र में रोड लाइट, सड़क मरम्मत के लिए जो बजट चाहिए उसके लिए रीको प्रबंध निदेशक से बात की जाएगी। इससे पूर्व मेवाड़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की ओर से पूर्व अध्यक्ष डॉ. पीएम बेसवाल, टेक्सटाइल ट्रेड फैडरेशन की ओर से कार्यकारी अध्यक्ष अतुल शर्मा, सिंथेटिक वीविंग मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय पेड़ीवाल, लघु उद्योग भारती के महेश हुरकट एवं अनूप बागड़ाेदिया ने विभिन्न समस्याएं रखी। चैंबर के अध्यक्ष जीसी जैन ने सभी का स्वागत किया। महासचिव आरके जैन ने संचालन किया। बैठक में जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक विपूल जानी, उपश्रम आयुक्त संकेत मोदी, रीको के क्षेत्रीय प्रबंधक पीआर मीणा ने भी भाग लिया।

उद्यमियाें ने ये प्रमुख समस्याएं और सुझाव बताए कलेक्टर काे

  • रीको औद्याेगिक एरिया में सभी उद्योगों से विकास शुल्क लेता है। एक इकाई कम से कम 35 हजार रुपए प्रतिवर्ष विकास शुल्क देती है लेकिन अभी भी कुछ जगह रोड बननी बाकी है। काफी जगह रोड टूटी है। पानी निकासी के लिए भी नालियों की उचित व्यवस्था नही है। सफाई भी नहीं हाेती। रोड लाइटें भी बंद रहती हैं।
  • उद्योगों के सामने एक नई समस्या ’मौताणे’ के रूप में सामने आई है। किसी उद्योग में श्रमिक के दुर्घटनावश या बीमारी के कारण, घर जाते हुए रास्ते में किसी दुर्घटना या अस्वाभाविक मृत्यु होने पर उद्यमियों पर मौताणे का दबाव बनाया जाता है। घेराबंदी और तोड़-फोड़ जैसी नौबत आ जाती है। जबकि कानूनी प्रक्रिया के तहत सभी उद्योग उचित मुआवजा देते हैं।
  • चित्तौड़गढ रोड पर स्थित उद्योगों से पिछले कुछ समय से असामाजिक तत्व हावी है। वे अवैध वसूली के लिए, जबरदस्ती कांट्रेक्ट लेने, मासिक बंधी के लिए उद्योगों में अनाधिकृत प्रवेश कर डराने-धमकाने, मारपीट, ताेड़फोड़ कर रहे हैं। उद्योगों के अधिकारियों के साथ रास्ते में भी मारपीट की घटनाएं बार-बार हो रही हैं।
  • लाॅकडाउन के बाद सभी औद्योगिक संगठनों, प्रमुख औद्योगिक इकाईयों, जिला प्रशासन के बीच 20 मई काे हुए समझाेते के अनुसार लोकडाउन अवधि का भुगतान श्रमिकाें व कर्मचारियाें काे किया गया। समझाेते की अन्य शर्तों का सभी पक्षों को विशेष रूप से श्रमिक संगठनों को भी पालना करने के लिए पाबंद किया जाए।
  • ठेकेदार का काम संतोषप्रद नहीं होने पर उसे बंद करने पर सभी श्रमिक काम बंद करके बाहर आ जाते हैं। ऐसी स्थिति में ठेकेदा बदलना और स्वयं के श्रमिक रखना मुश्किल होता है। समझाेते के बाद भी अलग-अलग बैठकों में हुए निर्णय की पालना नही की जा रही है।


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