बीएस-4 के वाहनों पर प्रतिबंध के बाद शहर में बढ़ते पॉल्यूशन पर कुछ हद तक नियंत्रण की उम्मीद जगी है। इसकी वजह हैं बीएस-6 वाहन। बीएस-6 वाहनों का पॉल्यूशन बीएस-4 की तुलना में पांच गुना तक कम है। यानी इनके प्रदूषण मानक शून्य हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2017 से बीएस-3 के वाहनों पर रोक लगाई थी।

इसके बाद तीन साल तक बीएस-4 के वाहनों की बिक्री हुई। अप्रैल 2020 से कोर्ट ने बीएस-4 वाहनों पर रोक लगा कर बीएस-6 के वाहन बेचने के लिए निर्माताओं को अधिकृत किया है। ऑटो मोबाइल्स एक्सपर्ट शशांक पोद्दार का कहना है कि बीएस-6 के वाहनों की बिक्री से पॉल्यूशन में कमी आएगी।
3 साल में 42 लाख बीएस-4 के वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ

प्रदेश में 3 साल में करीब 42 लाख बीएस-4 के वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ। इससे पहले बीएस-3 के 70 लाख वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। प्रदेश में अब तक 1 करोड़ 73 लाख वाहनों रजिस्टर्ड है। इसमें से 50 लाख वाहन अवधि पार हो चुके हैं। इनकी आरसी निलंबित कर दी गई है। बीएस-6 के वाहनों की बिक्री अप्रैल 2020 से शुरू हुई है। जून से सितंबर के बीच करीब 3 लाख बीएस-6 के वाहनों की बिक्री हुई है।



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बीएस-4 के वाहनों पर प्रतिबंध के बाद शहर में बढ़ते पॉल्यूशन पर कुछ हद तक नियंत्रण की उम्मीद जगी है
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