मौसम की मार से कमर तुड़वाए बैठे किसानों को नुकसान की भरपाई अभी तक भी नहीं हो पाई है। अगस्त और सितंबर माह में मौसम की बेरुखी से जिले में खरीफ की फसलों बाजरी, तिल, मूंग,ग्वार की फसलों में बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है तो कई क्षेत्रों में तो खरीफ की फसल पूरी तरह से खराब हो गई है। क्षेत्र में जुलाई माह में बारिश अच्छी होने से खरीफ की फसलें अच्छी लहलहा थी, लेकिन इसके बाद लगातार मौसम की बेरुखी से फसलें जल गई। सितंबर माह की शुरुआत में हुई बारिश से बची खुची फसलों में भी रोग लगने से खरीफ की फसल चौपट हो गई। इसके लिए सरकार के नुमाइंदों ने खेतों में जाकर मौका मुआयना भी नहीं किया है। धरतीपुत्र सरकार की तरफ आशा भरी नजरें लगाए बैठे हैं लेकिन अभी तक सरकार से कोई मदद नही मिल रही है।

बारिश नहीं होने से फसल खराब : क्षेत्र के मोकलसर, लुदराड़ा, मवड़ी, मायलावास, रमणिया, काठाड़ी, धीरा, भागवा, मोतीसरा, राखी सहित क्षेत्र में इस बार बाजरी, तिल, मूंग, मोठ सहित अन्य खरीफ की फसलों की खेती की गई थी। अगस्त-सितंबर माह में क्षेत्र में बारिश नहीं होने से किसानों की फसल खराब हो चुकी है। कई किसानों ने लाखों रुपए का कर्ज लेकर खरीफ की फसलों की बुवाई की थी। क्षेत्र के कई किसानों को 2018-19 खरीफ की फसल खराबे का भी क्लेम अभी तक नहीं मिला है ऐसे में क्षेत्र के किसानों की हालत बहुत खराब हो चुकी है। इस बार खरीफ की फसल खराब होने के साथ पशुओं के लिए चारा भी नही मिल रहा है।

क्लेम से वंचित किसान

2018-19 के खरीफ की फसल खराबे के क्लेम से भी कई किसान वंचित हैं। सरकार द्वारा केवल कागजी कार्रवाई ही की जा रही है। अभी तक खरीफ की फसल खराबे को लेकर कोई उचित कार्रवाई नहीं होने से किसान परेशान है। सरकार को किसानों के लिए राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए।
- बिशनसिंह सोमड़ा, भारतीय किसान संघ ब्लॉक अध्यक्ष सिवाना



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