तालकटाेरा पर पर्यटन हब के रूप में विकसित करने का सपना जलकुंभी ने निगल लिया है। छह साल में पहले यहां निगम ने भारी भरकम राशि खर्च कर रंगीन लाइटिंग, फाउंटेन चलाकर नाैकायान तक का सपना दिखाया था लेकिन अब तालकटाेर बदहाली पर राे रहा है।
बदहाली के बीच तालकटाेरे काे जलकुंभी ने निगल लिया है, क्याेंकि बीते एक साल से शहर की सरकार नहीं है, निगम के हिसाब से शहर दाे हिस्साें में बंट चुका है, सुध काैन ले? जलकुंभी के बीच पनप रहे मच्छराें से आसपास के इलाके में डेंगू, मलेरिया फैल रहा है।
तीज और गणगाैर उत्सव का गवाह रहा तालकटाेरा
जलमहल के बाद दूसरी सबसे बड़ी झील तालकटाेरे के पानी से कभी आसपास की आबादी की प्यास बुझाई जाती थी। कई सालाें से तीज और गणगाैर उत्सव का गवाह रहा तालकटाेरा की बदहाली काे देखने वाला तक काेई नहीं है। निगम ने छह साल पहले तालकटाेरे के बीचाें बीच 40 फीट ऊॅचा रंगीन फव्वारा चलाकर यहां नाैकायान और पर्यटन स्पाॅट के रूप में विकसित करने का जाे सपना दिखाया था उस सपने पर दीमक लग गई। और तालकटाेरे काे जलकुंभी निगल गई।
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