जोधेवाला गांव के आयुर्वेद अस्पताल के पीछे एक मकान जर्जर हाल में है। यहां जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। एक 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला मैले कुचैले कपड़े पहने टूटी चारपाई पर बैठी है। वह दाेनाें पैराें से दिव्यांग है और कई महीनों से नहाई भी नहीं लग रही। शायद नरक से बुरे अपने जीवन को कोस रही थी कि मैंने अपने बेटे-बहू के लिए क्या कुछ नही किया। तभी तपोवन ट्रस्ट अध्यक्ष महेश पेड़ीवाल, सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम अरोड़ा व समन्वयक त्रिलोक वर्मा इस बुजुर्ग के घर में आते हैं।
वे बुजुर्ग महिला से बात करते हैं। महिला ने बताया कि मेरा नाम बलदेव कौर है मेरा बेटा जगजीत व उसकी पत्नी संदीप कौर मुझे संभालते नहीं और न ही मुझे खाने के लिए देते है। तपोवन ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने जब पड़ोस में रहने वाले लोगों से जानकारी ली तो मामला सही पाया। बुजुर्ग की देखभाल करने व समय पर भोजन देने के लिए बेटे व बहू को पाबंद किया गया। साथ ही चूनावढ़ पुलिस थाने को सूचित किया गया ताकि बुजुर्ग महिला को कोई परेशानी न हो।
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