वन विभाग के अजमेर मंडल में लाखाें रुपए के हेरफेर का मामला सामने आया है। पाैधराेपण और जरूरी निर्माण में घालमेल के अलावा मनरेगा के काम में भी गड़बड़ी के आराेप एसीएफ पर लगाए गए थे। इन मामलाें की अंतरिम जांच में एसीएफ के अलावा पूर्व डीएफओ, रेंजर और कई वनपाल काे भी जिम्मेदार माना गया है। अंतरिम जांच में करीब 10 लाख रुपए से ज्यादा के हेरफेर का आकलन किया गया है। इस मामले में एसीएफ काे सस्पेंड करने की भी अनुशंसा की गई है।
वन मंडल अजमेर के कई कर्मचारियाें ने एसीएफ लाेकेश शर्मा के खिलाफ लिखित में शिकायतें दी थी। इन शिकायताें में कई गंभीर आराेप लगाए गए थे। सूत्रों ने बताया कि शिकायताें में कर्मचारियाें ने एसीएफ पर प्रताड़ित करने के अलावा डूमाडा ग्राम वन सुरक्षा एवं प्रबंध समिति सराधना में प्लांटेशन में हेरफेर करके भुगतान उठाने के आराेप लगाए थे। सूत्र के मुताबिक यहां 30 हजार पाैधे लगाए जाने थे, लेकिन 15 हजार पाैधे ही लगाए गए।
इसी तरह मल्चिंग 40 हजार रनिंग मीटर की बनानी थी लेकिन 10 हजार मीटर ही बनाई गई। 160 मीटर सूखे पत्थर की दीवार मार्च में भुगतान उठाने के बाद सितंबर में बनाई गई। 170 मीटर की खाई फैंसिंग आज तक भी नहीं बनाई गई। इसी तरह लगभग 23 साै रनिंग मीटर सूखे पत्थर की दीवार बनाई जानी थी, लेकिन इसके निर्माण में भी मापदंड पूरे नहीं किए गए और मापदंडाें के अाधार पर निर्माण का पूरा पैसा उठा लिया गया।
दीवार निर्माण में यूं खेला खेल
सूत्र ने बताया कि यह दीवार 4 फीट ऊंची बनानी थी, लेकिन 2300 रनिंग मीटर की दीवार तीन फीट ऊंची ही बनाई गई। ऊपर और नीचे से इस दीवार की चाैड़ाई भी मानकाें के अनुसार नहीं है। निर्माण में पत्थराें की पीचिंग भी सही तरीके से नहीं किया गया। जिससे यह दीवार कई जगहाें से वक्त से पहले ही ढह गई।
मनरेगा में हाेना था काम, सिर्फ भुगतान उठाया
सूत्रों ने बताया कि पुष्कर फीडर में मनरेगा श्रमिकाें से 2016 में 42 लाख की लागत से दाे हजार पाैधे लगवाए गए थे। 1 हजार 44 मनरेगा श्रमिकाें से पुष्कर फीडर में काम कराने की बजाय विभागीय पाैधाराेपण करा लिया। यहा काम पुष्कर गार्डन और कानस बासेली में कराया गया। इसके पेटे में दाे- दाे जगहाें से भुगतान उठा लिया गया।
जांच में सामने आया कि यहां लगाए गए दाे हजार पाैधे की जगह महज साढ़े सात साै पाैधे ही लगे हैं। जबकि भुगतान पूरे दाे हजार पाैधाें का उठाया गया। सूत्राें का दावा है कि पिछले एक साल में पुष्कर फीडर में पाैधे के संधारण के लिए मनरेगा में काेई काम नहीं कराया गया लेकिन इसके बाद भी लगभग ढाई लाख का भुगतान मजदूराें के खाते में डाला गया। इस मामले की शिकायत के बाद भी न ताे एसीएफ ने काेई ध्यान दिया न तत्कालीन डीएफओ ने काेई कार्रवाई नहीं की।
शिकायताें के बाद भी अनदेखी
सूत्र ने बताया कि इन सब शिकायताें की जांच जून 2020 में शुरू हुई। आला अधिकारियाें काे जब मामले की जानकारी मिली और पुष्कर की पूर्व विधायक नसीम अख्तर सहित अन्य जन प्रतिनिधियाें ने भी इसकी शिकायतें जयपुर स्तर पर की तब जून में सीसीएफ काे जांच करने के लिए कहा गया।
सीसीएफ सीआर मीणा की अंतरिम रिपाेर्ट में लाेकेश शर्मा के अलावा पूर्व डीएफओ सुदीप काैर, अजमेर रेंजर मालीराम प्रजापति, वनपाल पलास गुर्जर, सहायक वनपाल जयसिंह काे इन अनियमित्ताओं के लिए जिम्मेदार माना गया। इस अंतरिम रिपाेर्ट में डूमाडा ग्राम वन सुरक्षा और प्रबंध समिति सराधना में किए गए कामाें में ही सात लाख रुपए से ज्यादा का हेरफेर बताया गया है। जबकि अन्य मामलाें में तीन लाख से ज्यादा का हेरफेर बताया जा रहा है।
सस्पेंड करने की अनुशंसा
सूत्र ने बताया कि सीसीएफ मीणा ने इन सभी मामलाें की अंतरिम जांच में इतने बड़े हेरफेर के सामने आने के बाद एसीएफ लाेकेश शर्मा काे सस्पेंड करने की अनुशंसा भी आला अधिकारियाें से की है। इसके अलावा पूर्व विधायक नसीम अख्तर और अन्य नेताओं ने भी लाेकेश शर्मा काे अजमेर से तबादला करने की मांग की थी। मामले की जांच अभी भी जारी है और दावा किया जा रहा है कि कई बड़ी वित्तीय गड़बड़ियां सामने आ सकती हैं।
- फिलहाल मामले की जांच की जा रही है। एसीएफ और पूर्व डीएफओ के बयान अभी नहीं हुए है। ऐसे में इस पर ज्यादा कुछ अभी कहना ठीक नहीं हाेगा। - सीआर मीणा, सीसीएफ वन मंडल
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