नगर निगम चुनाव में आरक्षण की लाॅटरी के कारण कई लोगों की चुनाव की तैयारियां धरी रह गई। उनकी बजाय भाई-भतीजावाद को बढ़ावा देते हुए कांग्रेस ने किसी की पत्नी को टिकट दिया तो किसी की मां को टिकट दिया। इसमें युवा कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष मोहित गौतम की पत्नी शालिनी गौतम को टिकट दिया गया है।
वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री भुवनेश चतुर्वेदी के भतीजे अजय चतुर्वेदी को स्टेशन क्षेत्र से टिकट दिया है। एक पूर्व पार्षद पर तो पार्टी इतनी मेहरबान हुई कि उनकी पत्नी हेमलता खींची और भाभी सुमित्रा खींची दोनों ही टिकट दिया। यही नहीं एनएसयूआई के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रफुल्ल पाठक की मां शीला पाठक तथा पर्यावरण प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष पारस वर्मा की पत्नी प्रेमलता को टिकट दिया गया।
भाजपा: पूर्व डिप्टी मेयर के बेटे, पूर्व पार्षदाें की पत्नियाें काे मौका
बीजेपी में भाई-भतीजावाद को लेकर भले ही केंद्रीय नेतृत्व खिलाफ हो, लेकिन निगम चुनाव में ऐसे कई टिकट दिए गए हैं। हालांकि पार्टी नेताओं का कहना है कि जिन्हें टिकट दिए हैं, वे खुद पार्टी के सक्रिय वर्कर हैं, उनकी निजी छवि ही टिकट का आधार बनी है। पूर्व डिप्टी मेयर मणिभाई पटेल के बेटे दीपक भाई पटेल को कोटा उत्तर विधानसभा के वार्ड 8 से प्रत्याशी बनाया गया है। हालांकि वे खुद लंबे समय से सक्रिय राजनीति कर रहे हैं।
इसी तरह कोटा दक्षिण में पूर्व पार्षद साबिर भाटी की पत्नी अदा खान भाटी को वार्ड 13 से प्रत्याशी बनाया गया है, साबिर भाटी बीजेपी में बरसों से सक्रिय हैं। बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारी आसिफ मिर्जा की पत्नी तबस्सुम को वार्ड 14 से टिकट दिया गया है।
बीजेपी के पूर्व जिला मंत्री कैलाश गौतम की पत्नी प्रतिभा गौतम को वार्ड 48 से मौका दिया गया है। पूर्व पार्षद देवेंद्र चौधरी मामा की पत्नी पुष्पा चौधरी को वार्ड 50 से मैदान में उतारा है। पूर्व पार्षद प्रकाश सैनी की पत्नी अर्पणा को वार्ड 25 से टिकट मिला है। कुछ अन्य राजनीतिक परिवारों के भी नजदीकी रिश्तेदारों को टिकट मिले हैं।
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