आयुर्वेद पीजी डॉक्टर भी मरीजों की सर्जरी कर सकेंगे। जिससे आयुर्वेदिक अस्पतालों में आने वाले मरीजों को फायदा मिलेगा। हड्डी, नाक-कान-गला और दांतों की सर्जरी के अलावा 39 प्रोसीजर को कानूनी मान्यता दे दी है। जिसके लिए केन्द्र सरकार के सैन्ट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसन ने गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। आयुर्वेदिक अध्ययन के कोर्सेज में सर्जिकल प्रक्रिया के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल को जोड़ा जाएगा। अधिनियम का नाम बदलकर भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद संशोधन विनियम, 2020 कर दिया गया है। इधर, आईएमए के डॉक्टरों ने विरोध प्रारंभ कर दिया है।
पहले प्रशिक्षण फिर मिलेगी सर्जरी की अनुमति
आयुर्वेद पीजी के छात्र शल्य (सर्जरी) और शालाक्य चिकित्सा को लेकर प्रशिक्षण दिया जाएगा। छात्रों को शल्यचिकित्सा की दो धाराओं में प्रशिक्षित किया जाएगा और उन्हें एमएस (आयुर्वेद) जनरल सर्जरी और एमएस (आयुर्वेद) शालक्य तंत्र (नेत्र, कान, नाक, गला, सिर और सिर-दंत चिकित्सा का रोग) जैसी शल्य तंत्र की उपाधियों से सम्मानित भी किया जाएगा। देशभर में आयुष चिकित्सा की प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों की ओर से लंबे समय से एलोपैथी के समान अधिकार देने की मांग की जा रही थी।
सर्जरी आयुर्वेद की देन : विशेषज्ञों के अनुसार विश्व में सर्जरी आयुर्वेद की देन है। ऐसे में किसी भी पैथी को संकट नहीं है। विश्व के पहले सर्जन सुश्रुत थे जो आयुर्वेद चिकित्सा से जुड़े थे। संस्थानों में कुछ सर्जरी पहले भी हो रही थी। लेकिन कानूनी मान्यता नहीं होने से काफी अड़चने आ रही थी। नोटिफिकेशन के तहत अस्पतालों में एमएस (सर्जरी) योग्यताधारी डॉक्टर के साथ ओटी भी निर्धारित मापदड़ों पर होना चाहिए। सर्जरी के क्षेत्र में आयुर्वेद पिछड़ रहा था, अब नोटिफिकेशन के बाद में न केवल मरीजों को बल्कि पीजी करने वाले आयुर्वेद डॉक्टरों को फायदा मिलेगा।
भास्कर एक्सपर्ट पैनल : डॉ.संजीव शर्मा (निदेशक, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान), पी.हेमन्त कुमार (विभागाध्यक्ष, शल्य तंत्र), डॉ.महेश शर्मा, डॉ.सी.आर.यादव, डॉ.राकेश पाण्डेय ।
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