(अरविन्द शर्मा) देश के मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए ऑल इंडिया की 15 फीसदी सीटों के लिए फर्स्ट राउंड का सीट अलॉटमेंट गुरुवार को जारी होगा। इस बार यह अलॉटमेंट बेहद चौंकाने वाला हो सकता है। टॉप स्कोरर्स की संख्या में बढ़ोतरी के कारण कट ऑफ काफी उच्चा जाने की संभावना है।

दैनिक भास्कर ने विशेषज्ञों और आंकड़ों की मदद से नीट-यूजी स्कोर का डेटा विश्लेषण किया तो पता चला कि साल 2019 में महज तीन छात्रों ने 700 से अधिक स्कोर हासिल किया था। जबकि इस साल ये संख्या 111 है। राजस्थान के 12 छात्रों ने 700 से अधिक हासिल किए है। जबकि पिछले साल सिर्फ एक छात्र 700 के स्कोर पर पहुंच पाया था। कट ऑफ स्कोर में 3600 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल कुछ कॉलेजों की कट ऑफ 687 तक थी। इस हिसाब से यह इस साल 700 तक जा सकती है।

पिछले साल मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज की कट ऑफ 687 थी। इस साल एम्स में दाखिला भी नीट के जरिए ही होगा। तीसरी पसंद जेआईपीएमईआर हैं।

650-699 के स्कोर में इस साल 3903 छात्र है। जबकि पिछले साल 1022 छात्र थे। यह 281 प्रतिशत से अधिक है। विशेषज्ञ मानते हैं कि टॉप स्कोरर्स की संख्या बढ़ने से कट ऑफ भी काफी ज्यादा जाने वाला है। इस साल एमबीबीएस की 80 हजार और बीडीएस की 38 हजार से ज्यादा सीटें हैं। इनमें से 42500 सीटें सरकारी कॉलेजों की है, इनमें एम्स और जेआईपीएमईआर भी शामिल हैं। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग इडब्ल्यूएस कैटेगरी के लिए अतिरिक्त 10 फीसदी सीटें भी रिजर्व की गई है।

राजस्थान में 500 से अधिक स्कोर करने वाले छात्राें की संख्या इस साल 11698 है, पिछले साल यह आंकड़ा 7659 था

500 अंक से अधिक वाले छात्रों की स्कोरिंग से कैसे फर्क पड़ेगा?
2019 की तुलना में इस साल 500 से अधिक स्कोर करने वालों की संख्या 37806 से अधिक हैं। राजस्थान में 4559 छात्रों ने इस साल 500-549 के बीच स्कोरिंग की है। 2019 में इनकी संख्या 3450 थी। जाहिर है कि स्कोरिंग बढ़ने से यह छात्र हर राज्य के मेडिकल कॉलेज की सीटों पर असर डालेंगे।

इस बार कौनसे राज्यों के छात्रों की वजह से कट ऑफ ज्यादा जाएगी?
इस साल राजस्थान, केरल, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तरप्रदेश, दिल्ली व हरियाणा के छात्रों ने इस साल उल्लेखनीय स्कोरिंग हासिल की है। विशेषज्ञ मानते हैं कि लॉक डाउन में छात्रों को तैयारी के लिए काफी समय मिल गया, जिसका फायदा मिला।

क्या राजस्थान की काउंसलिंग में कट ऑफ ऊपर जाने की संभावना है?
पीसीपी के डॉ. पीयूष सुंडा का कहना है कि राजस्थान के छात्रों ने इस साल जिस तरह की स्कोरिंग हासिल की है, उससे लगता है कि राजस्थान की काउंसलिंग में भी कट ऑफ ऊपर ही रहेगी। इस साल 500 से अधिक अंक लाने वाले छात्रों की कुल संख्या 11698 है। जबकि पिछले साल यह आंकड़ा महज 7659 था। 220% से अधिक बढ़ोतरी बताती है कि कट ऑफ ज्यादा ही रहेगी। राजस्थान में 611 से अधिक अंक लाने वाले छात्रों को ही सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलने की संभावना है।

ऑल इंडिया व राजस्थान काउंसलिंग में सीट नहीं मिली तो क्या करूं?
विदेशों में मेडिकल कॉलेज में दाखिले करवाने वाले जगविमल कंसल्टेंट्स जयपुर के वेदप्रकाश बेनीवाल बताते हैं कि राजस्थान के 2000 से अधिक छात्र हर साल विदेश में मेडिकल की पढ़ाई के लिए जाते हैं। वहां फीस भी कम है। विदेशी मेडिकल यूनिवर्सिटी ने एडमिशन प्रक्रिया करीब-करीब पूरी कर ली है। चीन व कजाखिस्तान में अधिकांश यूनिवर्सिटी की अंतिम तारीख 5 नवंबर है। 15 नवंबर से ऑनलाइन क्लासेज शुरू जाएगी। कजाखिस्तान में तो कई यूनिवर्सिटी ने जनवरी 2021 के बैच के लिए भी एडमिशन लेने शुरू कर दिए हैं। काउंसलिंग में पिछड़ने वाले छात्र यहां आवेदन कर सकेंगे।



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इस टेबल के जरिए समझिए राजस्थान के छात्रों ने भी इस साल काफी अच्छा स्कोर हासिल किया है, इसलिए कट ऑफ ऊंची कैसे जाएगी?
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