प्रेम व खुशी की कोई उम्र नहीं होती। इसी उत्साह के साथ सिमरथनगर निवासी रामूराम जाणी ने अपना 90वां जन्मदिन मनाया। खास बात यह कि उन्होंने पहली बार ही जन्मदिन मनाया। वह भी अपने पोते थल सेना में लांस नायक आईदान के आग्रह पर। आईदान छुट्टी आए हुए हैं और उन्होंने दादा के चेहरे पर खुशी व मुस्कान देखने के लिए उन्हें बिना बताए उनके बचपन के साथियों को घर बुलाया।
उन्हें भी इसकी जानकारी नहीं थी कि रामूराम जन्मदिन भी मनाएंगे लेकिन पोते ने सब तैयारियां कर रखी थी। किसान दादा के लिए जन्मदिन मनाने जैसा पहला अनुभव था। जैसे उन्हें बताया गया वैसे ही उन्होंने केक पर चाकू चलाया। केक कटते ही पोते-पोतियों ने दादा को बधाई दी तो एकबारगी सभी बुजुर्ग खुशी से झूम उठे। इस दौरान बुजुर्ग रामूराम जाणी की पत्नी गंवरी देवी, पुत्र आसूराम, अणदाराम, झुमराराम, पीराराम, पुत्री भूरी देवी, पन्नी देवी सहित बेटे बहु व पोते पोतियां नातिन आदि परिवार के 63 सदस्य मौजूद रहे।
इस उम्र में भी ऐसी दिनचर्या, सुबह 4 बजे उठकर स्नान, कभी नशा नहीं किया
रामस्नेही जाणी ने नई पीढ़ी को नशे से दूर रहने की भोलावण दी। उन्होंने अपने स्वास्थ्य का राज सुबह चार बजे उठकर स्नान करने को बताया। उनके बचपन के मित्र पूनमाराम भाम्भू, उदाराम बुडिया, खेताराम गोदारा, दयाराम सारण, पुनमाराम बड़ेटा, सोनाराम, तेजाराम, आसूराम, प्रताप राम, अणदाराम, हिम्मताराम, प्रताप राम, भोमा राम, रूपाराम, झुमरराम, मोटाराम, मानसिंह, नाथूराम, पीराराम के अलावा जगदीश चन्द्र, पुखराज, भोजाराम, हुकमाराम, हरिकिशन, अचलाराम, मोहनराम ने उनको बधाई दी और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की।
उन्होंने बताया कि सौ साल पहले कोरोना जैसी बीमारी आई थी। रामूराम ने बताया कि उनके पिता व दादा उस बीमारी को धास्ति कहते थे। तब उनको जागरूक करने वाला कोई नहीं था लेकिन लोग मुंह ढ़ककर घरों से बाहर निकलते थे।
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