बिना क्लोअर लीफ बने शुरू की गई रिंग रोड पर वाहन मालिक अब टोल देने के बाद ही निकल सकेंगे। रिंग रोड पर दो टोल प्लाजा हैं। इन टोल से हर दिन करीब 11 लाख वाहनों से करीब 15 लाख रुपए का टोल लिया जा रहा है। हर टोल पर 26 टोल बूथ लगे हुए हैं। 13 बूथ आने के लिए और 13 बूथ जाने के लिए हैं। दोनों टोल पर 52 बूथों के माध्यम से वाहन निकल रहे हैं।

46 किमी की आगरा रोड से अजमेर रोड के बीच में बनी रिंग रोड को तैयार करने में 810 करोड़ रुपए की राशि खर्च हुई है। इस रिंग रोड की सौगात शहरवासियों को 10 साल बाद मिली है। रिंग रोड बनने का काम 2011 में जेडीए की ओर से शुरू किया था, लेकिन बीच में कंपनी के छोड़ देने के बाद 2018 में एनएचएआई को सौंपा दिया गया। इसके बाद एनएचएआई ही रिंग रोड का निर्माण कर रही थी।
118 करोड़ की लागत से दो क्लोअर मील
रिंग पर बनने वाले दो क्लोअर लीफ 118 करोड़ की लागत से दो साल में तैयार होंगे। इसमें टोंक रोड से अजमेर रोड के बीच बनने वाले क्लोअर लीफ का काम तो शुरू हो गया है, लेकिन टोंक रोड से आगरा रोड के बीच का काम अटका हुआ है।

कब बनेगी अजमेर रोड से दिल्ली-आगरा रोड को जोड़ने वाली रिंग रोड
आगरा रोड से टोंक-अजमेर रोड को जोड़ने वाली रिंग रोड तो शुरू हो गई, लेकिन अब अजमेर रोड से दिल्ली-आगरा रोड को जोड़ने वाली रिंग रोड की मांग उठने लगी है। इसको लेकर जेडीए और एनएचएआई ने अभी तक कोई प्लानिंग नहीं की है। यहां तक की अवाप्ति के लिए जमीन तक चिह्नित नहीं की गई है।

टोल में नहीं होगा जेडीए का हिस्सा
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अजय आर्य ने बताया कि रिंग रोड पर टोल से वसूली जाने वाली राशि में जेडीए का हिस्सा नहीं होगा। यह राशि एनएचएआई के खाते में जाएगी। राशि का कुछ हिस्सा रिंग रोड के दोनों तरफ और डिवाइडर पर ग्रीनरी डवलप करने में खर्च किया जाएगा।



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11 lakh vehicles pass through the ring road daily, 15 lakh revenue from toll tax
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