जिला परिषद में गुरुवार को जिला प्रमुख और पंचायत समितियों में प्रधान के चुनाव हुए। पूर्व सैनिक कल्याण बोर्ड अध्यक्ष प्रेमसिंह बाजौर की पुत्रवधु गायत्री कंवर 24 वोटों के साथ जिला प्रमुख बनीं। भाजपा के निर्वाचित सदस्य 20 थे। यहां भाजपा कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाने में कामयाब रही। कांग्रेस के तीन वोट भाजपा के खाते में चले गए। कांग्रेस की सोहनी देवी को महज 15 वोट ही मिल पाए।

जिले की 12 पंचायत समितियों में से भाजपा 6 और कांग्रेस 6 स्थानों पर प्रधान बनाने में सफल रही। लक्ष्मणगढ़ में देर रात तक फैसला हुआ। इधर, धोद पंचायत समिति पिता के बाद बेटी को प्रधान पद मिला। यहां प्रधान चुनी गई सुनीता रणवां के पिता ओमप्रकाश झीगर धोद पंस. के निर्वतमान प्रधान हैं।
सुबह 10 बजे जिला परिषद सभागार में भाजपा से गायत्री कंवर और कांग्रेस की सोहनी देवी ने नामांकन भरा। नामांकन जांच के बाद तीन बजे से मतदान हुआ। वोटिंग की शुरुआत दो कांग्रेस सदस्यों ने की। इसके बाद भाजपा के सभी सदस्यों ने एक साथ मतदान किया। भाजपा से निर्वाचित सभी सदस्य खाटूश्यामजी से सीधे जिला परिषद पहुंचे।

चुनाव के दौरान कांग्रेस का कोई वरिष्ठ नेता नजर नहीं आया। जबकि भाजपा में सांसद सुमेधानंद सरस्वती, प्रेमसिंह बाजौर, किसान मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष हरिराम रणवां, भाजपा जिलाध्यक्ष व जिला परिषद सदस्य इंदिरा चौधरी मौजूद रहे। गायत्री कंवर के विजयी घोषित होने के बाद वे जुलूस के साथ सीधे संघ कार्यालय पहुंची। यहां उन्होंने संघ पदाधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान जगह-जगह स्वागत किया गया।
पहला इंटरव्यू : शायद कांग्रेस से निवार्चित हुए सदस्य अपनी पार्टी से संतुष्ट नहीं थे, इसलिए हमें वोट दिया

सवाल : आप लागातार चौथी महिला जिला प्रमुख बनीं हैं, महिलाओं के लिए क्या विशेष करने की योजना रहेगी?
जवाब : मैं खुद महिला हूं। इसलिए ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं की परेशानी को बखूबी समझती हूं। ग्रामीण महिलाओं बहुत प्रतिभाएं हैं। हम उनकी काउंसलिंग करवाकर उनके टेलेंट को सही मंच तक लाने का प्रयास करेंगे।
सवाल : आप राजनीति में नई हैं। जिला परिषद राजनीति का बड़ा क्षेत्र है। काम और मॉनिटरिंग कैसे कर पाएंगी?
जवाब : इंसान हर काम पहली बार ही करता है। बस उसका मैनेजमेंट सही होना चाहिए। मुझे विश्वास है कि सबस के साथ से हर काम आसान हो जाता है। सबका साथ रहेगा तो सबका विकास होता रहेगा। सीकर में भी विकास होगा।
सवाल : भाजपा के 20 सदस्य निर्वाचित हुए थे, आपको चार वोट ज्यादा कैसे मिले।
जवाब : मुझे पार्टी सदस्यों से ज्यादा वोट मिले हैं। संभवतया कांग्रेस से निवार्चित सदस्य अपनी पार्टी से संतुष्ठ नहीं थे। इसलिए हमें कांग्रेस के भी वोट मिले।
सवाल : प्रदेश में कांग्रेस सरकार है। नवाचार के प्रोजेक्ट कैसे लागू करेंगे?
जवाब : हम विकास के काम में सबको साथ लेकर चलेंगे। सरकार पूरी जनता की होती है। जरूरत पड़ने पर जनता के लिए सरकार से मदद लेना भी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। विकास के काम में कोताही नहीं बरती जाएगी।

एजुकेशन : बीबीए, एम. कॉम इसलिए मिला मौका

जिला प्रमुख का पद सामान्य आरक्षित होने और पंचायत चुनाव में जीत दिलाने की जिम्मेदारी सैनिक कल्याण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और पंचायत चुनाव संयोजक प्रेमसिंह बाजौर पर हाेने का फायदा मिला।
चुनौती : प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है। जिले में किसी भी विधानसभा में भाजपा विधायक नहीं हैं। यह बड़ी चुनौती रहेगी। कांग्रेस काफी समय से जिप में विपक्ष में हैं। उनके सवालों का सामना करना होगा।
राजनीतिक बैकग्राउंड : ससुर प्रेमसिंह बाजौर दो बार नीमकाथाना से विधायक व सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष रहे हैं। सास सुप्यार कंवर पिपराली प्रधान रही हैं। चाचा ससुर बाबुसिंह बाजौर भाजपा जिला उपाध्यक्ष हैं। पीहर में चाचा सुरेंद्रसिंह राठौड़ कुंभलगढ़ से विधायक रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल : क्रॉस वोटिंग किसने की?

कांग्रेस की बाड़ाबंदी : झुंझुनूं बाईपास पर निजी कॉलेज में कांग्रेस सदस्य बाड़ाबंदी में थे। श्रीमाधोपुर क्षेत्र के दो सदस्य पहले वोट डाल गए। इसके पौन घंटे बाद अन्य कांग्रेस सदस्यों ने वोट डाला।
निर्दलीय सदस्य : निर्दलीय सदस्य सुभाष बाज्या कांग्रेस सदस्यों के साथ वोट देने पहुंचे। ये सभी भाजपा सदस्यों की वोटिंग के बाद पहुंचे। जिला परिषद में भाजपा को निर्दलीय सदस्य का वोट मिला है तो कांग्रेस से तीन सदस्यों की क्राॅस वोटिंग हुई। अगर निर्दलीय का वोट कांग्रेस के खाते में गया है तो कांग्रेस से चार सदस्यों की क्रॉस वोटिंग हुई है।
भाजपा की बाड़ाबंदी : भाजपा ने निर्वाचित सदस्यों की बाड़ेबंदी खाटूश्यामजी में थी। निर्वाचित सदस्यों को सीधे जिला परिषद भवन लाया गया।
कांग्रेस के तीन विधायक फेल, दो को 100 फीसदी अंक

जिले की आठों विधानसभा में कांग्रेस का कब्जा है। इसके बावजूद कांग्रेस आधी पंचायत समितियों में ही प्रधान नहीं बना पाई। कांग्रेस का गणित 12 में से 6 सीटों पर ही अटक गया। भास्कर ने पंचायतीराज में कांग्रेस की सरकार बनाने को लेकर विधायकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया। दांतारामगढ़ वीरेंद्रसिंह, धोद विधायक परसराम मोरदिया व सीकर विधायक राजेंद्र पारीक फेल साबित हुए। लक्ष्मणगढ़ विधायक गोविंदसिंह डोटासरा और फतेहपुर विधायक हाकम अली को पूरे अंक मिले।

प्रधान बनाने में विधायकों का रिपोर्ट कार्ड
नीमकाथाना सुरेश मोदी 5/10
खंडेला महादेवसिंह 5/10
श्रीमाधोपुर दीपेंद्रसिंह 5/10
दांतारामगढ़ वीरेंद्रसिंह 0/10
धोद परसराम मोरदिया 0/10
लक्ष्मणगढ़ गोविंदसिंह डोटासरा 10/10
फतेहपुर हाकम अली 10/10
सीकर राजेंद्र पारीक 0/10

निलंबित सदस्य को कोर्ट के आदेश पर बंद लिफाफे में दिलाया वोट भाजपा-कांग्रेस को 12-12 वोट, लॉटरी से कांग्रेस के मदनलाल प्रधान

लक्ष्मणगढ़ में राजनीतिक विवाद पंचायतीराज से होते हुए कोर्ट तक पहुंच गया। पंचायतीराज से वार्ड 18 से निलंबित भाजपा के नवनिर्वाचित सदस्य विजेंद्र को कोर्ट के दखल के बाद बंद लिफाफे में मतदान का अधिकार दिया। कोर्ट ने मामले में 23 दिसंबर को जवाब मांगा है। देर रात भाजपा-कांग्रेस की सहमति पर शेष मतों की मतगणना की गई।

25 सदस्यों में से भाजपा के भागीरथ और कांग्रेस के मदनलाल को 12-12 मत मिले। जिला निर्वाचन अधिकारी के आदेश पर रात 12.45 बजे लॉटरी निकाली गई। इसमें कांग्रेस के मदनलाल प्रधान निर्वाचित हुए। एसडीएम कुलराज मीणा देर रात तक बार-बार फैसले बदलते रहे। निवार्चित सदस्य विजेंद्र की पत्नी के तीन संतान होने की शिकायत एसडीएम डा. कुलराज मीणा को मिली।

एसडीएम ने निर्वाचित सदस्य को नोटिस देते हुए मामले की जांच करवाई। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में 20 नवंबर को मिसिंग डिलीवरी मानते हुए तीसरी संतान होना बताया गया। वहीं ग्राम सेवक की रिपोर्ट में ग्रामीणों की ओर से विजेंद्र की पत्नी अंजू देवी के तीसरी संतान होने की जानकारी दी गई। इस रिपोर्ट के आधार पर पंचायतीराज विभाग के अतिरिक्त आयुक्त एवं संयुक्त शासन सचिव (जांच) ने नवनिर्वाचित सदस्य को निलंबित कर दिया।
कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में 3 दिसंबर को तीसरी संतान का जन्म, देर रात दिया प्रत्याशी का वोट नहीं गिनने का आदेश

पहली दलील : राजस्थान पंचायत राज अधिनियम, 1994 (1995 का अधिनियम) की धारा 38 (4) के तहत सरकारी आदेश जारी किया गया है। धारा 38 (5) के अनुसार सिविल कोर्ट इस तरह के आदेश में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है।
दूसरी दलील: अदालत का आदेश रिटर्निंग अथॉरिटी के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करता है क्योंकि चुनाव में वोटिंग के अधिकार का सवाल चुनाव की कार्यवाही का एक हिस्सा है और इस तरह का सवाल रिटर्निंग अथॉरिटी द्वारा ही तय किया जा सकता है। रिटर्निंग अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में दखल देने वाले किसी भी सिविल कोर्ट का कोई भी आदेश 1994 के अधिनियम की धारा 117A (C) के प्रावधानों का उल्लंघन करता है।
तीसरी दलील: जिसके आधार पर मतगणना के आदेश दिए
अदालतों के आदेश में कहा गया है कि संबंधित सदस्य के वोट को “सीलबंद कवर” में रखा जाएगा। यह स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि अदालत ने चुनाव कार्यवाही को बाधित करने या रोकने का इरादा नहीं किया था। यह इस तथ्य से भी स्पष्ट है कि अदालत ने केवल संबंधित सदस्य को वोट देने की अनुमति दी है, लेकिन चुनाव की कार्यवाही को रोकने के लिए कोई आदेश नहीं दिया है।
आगे क्या : सदस्यता रद्द होती है तो भाजपा-कांग्रेस के बराबर-बराबर मत माने जाएंगे। ऐसे में लॉटरी से विजेता घोषित प्रधान को प्रभावी मानेंगे। सदस्यता बरकरार रहती है तो लिफाफे से वोट खोलकर जोड़ा जाएगा। इसके आधार पर ज्यादा मत वाले प्रत्याशी को प्रधान घोषित किया जाएगा।

लक्ष्मणगढ़ में खुलेआम सत्ता का दुरुपयोग : भाजपा
भाजपा किसान मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष हरिराम रणवां का कहना है कि सरकार की ताकत का दुरुपयोग किया गया है। चुनाव प्रक्रिया में भाग लेकर निर्वाचित हुए सदस्य को प्रधान के चुनाव से वंचित रखने का कांग्रेस ने षड्यंत्र रचा। पूरे घटनाक्रम में न्यायालय के काम को भी प्रभावित करने का प्रयास किया गया है। मतदाताओं के रास्ते रोकने का प्रयास किया गया है। लक्ष्मणगढ़ में प्रधान भाजपा का बनना तय है। हमारा मत लिफाफे में बंद है। कोर्ट के आदेश से मत की गणना होने पर प्रधान भाजपा का बनेगा।



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District Head: Congress's Gayatri also won 3 votes of Congress: Laxmangarh: Congress won the lottery loss at 12:45 pm
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