बिजली बचत और बिलो की राशि को कम करने के लिए शहर में लगाई गई एलईडी लाइटों का मेंटिनेंस तीन कंपनियों के बीच में उलझ गया है। कंपनियों के बीच में क्षेत्राधिकार की लड़ाई होने से खराब लाइटों का मेंटिनेंस समय पर नहीं हो रहा है। इससे आमजन को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
दरअसल सरकार ने ईईएसएल कंपनी को नगर निगम क्षेत्र में एलईडी लाइट लगाने व उनका मेंटिनेंस करने का टेंडर दिया था। कंपनी यह टेंडर लेने के बाद में एलईडी लाइट लगाने व उनके मेंटिनेंस के लिए तीन अन्य कंपनी ऑरियंटल, फ्लोरिडा आैर ईओएन को काम सौंप दिया।
तीनों कंपनियों को सरकार के टेंडर के मुताबिक 1.30 लाख एलईडी लाइट लगानी थी और उनका मेंटिनेंस करना था। शहर में ईईएसएल की तीनों कंपनियों ने लगभग शहर में आवंटित सभी प्वाइंट पर लाइटें लगा दी है। लेकिन अगर अब कोई लाइट खराब हो जाती है तो उसका मेंटिनेंस करने पर तीनों कंपनियों के बीच में विवाद हो जाता है।
तीनों कंपनियां एक-दूसरे का क्षेत्राधिकार नहीं होने का हवाला देकर मामले से पल्ला झाड़ लेती है। ऐसे में खराब लाइट सही ही नहीं हो पाती है। इसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। हाल ही में कंपनी की कार्यशैली पर ग्रेटर नगर निगम डिप्टी महापौर ने भी नाराजगी जताई है। ऐसे में अब नगर निगम ने ईईएसएल कंपनी को नोटिस देकर मेंटिनेंस का काम केवल एक कंपनी द्वारा ही करने के लिए अधिकृत किया है। ताकि खराब लाइट तय समय में ठीक हो सके।
कंपनी ने निगम के तीन जोन में लगाई थी लाइटें, अब वेंडर्स के बीच गली-मोहल्ले की लड़ाई
पड़ताल में सामने आया कि शहर में एलईडी लाइट लगाने के लिए एस्को व ईईएसएल कंपनी को टैंडर दिए गए थे। ईईएसएल कंपनी को सिविल लाइन जोन, विद्याधर नगर जोन और मानसरोवर जोन में लाइटें लगानी थी। अभी तक सात हजार प्वाइंट पर कंपनी ने तीनों जोन में लाइटें नहीं लगाई हैं। तीनों जोन में अगर अब लाइट खराब हो जाती है तो निगम को पहले यह मालूम करना पड़ता है कि ईईएसएल कंपनी के किस वेंडर्स ने संबंधित प्वाइंट पर लाइट लगाई थी। तीनों वेंडर्स के बीच में अब गली-मोहल्ले की लड़ाई शुरू हो गई है।
एक कंपनी को ही करना पड़ेगा मेंटिनेंस
- कंपनी ने तीन वेंडर्स से काम करवा लिया है। ऐसे में अब मेंटिनेंस में काफी परेशानी आ रही है। अगर कोई लाइट खराब होने की सूचना मिलती है तो संबंधित कंपनी को शिकायत का निस्तारण करने के लिए बोला जाता है तो एक-दूसरे पर टालमटोल कर दिया जाता है। ऐसे में अब कंपनी को अधिकृत किया है कि एक कंपनी से ही मेंटिनेंस कराया जाए। ऐसा नहीं होने पर पेनल्टी लगाई जाएगी। - किरण कंवर, एक्सईएन, बिजली शाखा नगर निगम ग्रेटर
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