भाजपा की ममता अपने नाम में शामिल कुंवर (राजकुमार) के अनुरूप गुरुवार को उदयपुर की जिला परिषद की राजकुमार बन गईं। उन्होंने जिला प्रमुख के चुनाव में कांग्रेस की विशल्या को 12 वोट से हराया। ममता को कुल 43 वोटों में से 27 वोट मिले, जबकि विशल्या को 15 वोट। वार्ड 30 से जनता सेना समर्थित निर्दलीय जमुना ने मतदान में भाग नहीं लिया। इधर, प्रधान का चुनाव बड़ी उलटफेर वाला रहा। कुल 20 सीटों में से भाजपा को 8 तो कांग्रेस को 7 पर बढ़त मिली थी, जबकि 5 पर निर्दलीयों के भरोसे प्रधान चुने जाने थे।

ऐनवक्त पर कांग्रेस ने सलूंबर सीट पर भाजपा में सेंध लगाते हुए प्रधान का पद छीन लिया तो पांच सीटों में से चार में निर्दलीयों से जोड़-तोड़ कर प्रधान बनाने में सफल रही। कुल 20 प्रधानों में से कांग्रेस के 12, भाजपा के 7 और एक प्रधान पूर्व विधायक रणधीर सिंह भींडर के नेतृत्व वाली जनता सेना का बना। उप प्रमुख और उप प्रधान के चुनाव शुक्रवार काे हाेंगे। जिला परिषद सभागार में शाम 5 बजे जिला निर्वाचन अधिकारी चेतन देवड़ा ने ममता काे विजयी घाेषित किया।
61 साल में पहली बार 25 साल की सबसे युवा प्रमुख
जिले में 1959 से पंचायतीराज चुनाव शुरू हुए थे। पहली बार कांग्रेस के रोशनलाल शर्मा प्रमुख बने। पहली महिला प्रमुख भाजपा की वंदना मीणा बनीं। ममता 61 साल में उदयपुर की पहली सबसे युवा प्रधान बन गईं।
25 साल में चौथी महिला प्रमुख
नाम पार्टी कब से कब
वंदना मीणा भाजपा 1995 से 1999
सज्जन कटारा कांग्रेस 1999 से 2000
मधु मेहता कांग्रेस 2010 से 2015
ममता कुंवर भाजपा
देहात जिलाध्यक्ष पिता ने तैयार कर रखी थी बेटी को जिला प्रमुख बनाने की बिसात, टिकट उन्हें दिए, जो साथ दे सकें
ममता कुंवर को जिला प्रमुख के पद तक पहुंचाने में भाजपा देहात जिलाध्यक्ष पिता
भंवरसिंह पंवार की अहम भूमिका रही। उन्होंने अपनी बेटी को यहां तक पहुंचाने के लिए टिकट वितरण से पहले ही फील्डिंग जमा ली थी। दरअसल, प्रदेश में उदयपुर ही भाजपा का ऐसा जिला है, जहां दो जिलाध्यक्ष हैं। एक शहर और दूसरा देहात। शहर जिला अध्यक्ष रवींद्र के पास दो मंडल बड़गांव और गिर्वा हैं। बाकी का जिम्मा पंवार के पास है। उन्होंने ही अिधकांश टिकट बांटे। ऐसे लोगों को टिकट दिलवाए, जो जरूरत पड़ने पर उनका साथ दे सकें। बेटी ममता को भी टिकट दिलवाया। चुनाव हुए तो जैसी रणनीति बनाई थी, उसकी जरूरत भी पड़ गई।
जिला प्रमुख के दावेदारों में रीना भाणावत, शहर से सटे बड़गांव की डाॅ. पुष्पा शर्मा और भुवाणा की सुनीता मांडावत का नाम ममता के साथ चला। बुधवार काे जिला चुनाव प्रभारी ओम पालीवाल की मौजूदगी में रायशुमारी हुई तो यह बात खुलकर रखी कि जिला परिषद में अधिकांश सदस्य देहात से आते हैं ताे जिला प्रमुख भी देहात से ही बने। निगम में मेयर शहरी बनता है और जिला प्रमुख भी शहरी काे बनाया जाता है ताे यह देहात के साथ अन्याय हाेगा। लॉबिंग में ममता के लिए उन सदस्यों ने ममता का साथ दिया। जिनके पिता ने उन्हें टिकट दिलाया था। और आखिर ममता जिला प्रमुख पद तक पहुंच गईं।
उम्र और अनुभव की कमी आड़े नहीं आएगी: ममता
जिले की सबसे युवा जिला प्रमुख ममता कुंवर ने कहा कि अनुभव और छाेटी उम्र से कुछ फर्क नहीं पड़ता। हम अपनी बात पूरी ताकत और मजबूती से सामने रखेंगे ताे जाे चाहते हैं, वह कर दिखाएंगे। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का लाभ भी लूंगी और सभी काे साथ लेकर चलूंगी। गांवाें में पेयजल, शिक्षा, सड़क और कृषि क्षेत्र में विकास पर जाेर रहेगा। आदिवासी क्षेत्र का विकास भी लक्ष्य रहेगा।
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