कोरोना से मरीज को बचाने व गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर पर जाने से रोकने के लिए पूरे विश्व में दवाओं के ट्रायल किए जा रहे हैं। डब्ल्यू्एचओ ने पूर्व में दूसरी बीमारियों की दवाओं को कोविड मरीजों पर ट्रायल कर दवा खोजने की कोशिश की, लेकिन परिणाम दुखद रहे।
एम्स पल्मोनरी मेडिसिन के एडिशनल प्रोफेसर व ट्रायल में प्रिसिंपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. निशांत चौहान ने बताया कि डब्ल्यूएचओ ने दवा खोजने को लेकर पुरानी दवाओं का कोरोना मरीजों पर ट्रायल किया। इसमें एम्स ने भी मरीजाें पर ट्रायल किया। कोरोना मरीजों को दी जा रही हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (एचसीक्यू), लोपिनावीर, इंटरफेरॉन और रेमेडिसिवीर व स्थानीय स्तर पर मिल रही केयर (सर्दी-जुकाम की दवा, कफ-सिरप आदि) को ट्रायल में रखा गया। शेष | पेज 7
कोरोना में रेमेडिसिविर रामबाण नहीं लोपिनावीर व इंटरफेरॉन भी बेअसर
दुनियाभर के 30 देशों के 405 हॉस्पिटलों में भर्ती 11330 मरीजों पर यह ट्रायल किया गया, लेकिन मरीजों पर इन दवाओं का असर बिल्कुल दिखाई नहीं दिया। ये दवाएं न मरीजों को बचाने में कारगर साबित हुई और न ही वेंटिलेटर पर जाने से रोक सकी। ये रेंडमाइज कंट्रोल ट्रायल स्टडी थी। इसमें किस मरीज को कौनसी दवा दी जानी है, यह सब कम्यूटरजनित सॉफ्टवेयर में मरीज की डिटेल डालने के बाद वह बताता था।
डॉ. निशांत ने बताया कि पूरा ट्रायल इंश्योर्ड था। यदि किसी मरीज को दवा के कारण कुछ अनहोनी होती है तो उसे आर्थिक मदद भी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि रेमेडिसिवीर कोविड में रामबाण नहीं है। एम्स के ट्रायल में डॉ. चौहान के साथ को-इन्वेस्टिगेटर डॉ. पंकज भारद्वाज, डॉ. जयकरण चारण, डॉ. एमके गर्ग, डॉ. पीके भाटिया, डॉ. विजयलक्ष्मी नाग, डॉ. नवीन दत्त शामिल थे।
हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन सबसे नुकसानदायक
दवाओं के ट्रायल में एचसीक्यू को सर्वाधिक नुकसानदायक पाया गया। जिन मरीजों को यह दी गई, उनमें ज्यादा मृत्युदर पाई गई। इसके अंतरिम एनालिसिस में दवा को ट्रायल से हटा दिया गया। ऐसे ही लोपिनावीर दवा में भी देखा गया, जिसके बाद उसे भी ट्रायल से हटा दिया गया। बाद में इंटरफेरॉन और रेमेडिसिवीर ही ट्रायल में रही। अंत में इंटरफेरॉन काे भी फायदा ना मिलने पर हटा दिया गया। इसलिए ट्रायल में शामिल विषय विशेषज्ञों ने बाकी तीनों दवाओं पर ट्रायल बंदकर रेमेडिसिवीर पर बड़े स्तर पर ट्रायल करने की बात कही है। कुछ नई दवाएं भी इस ट्रायल में शामिल होंगी।
ट्रायल में 1253 की मौत
रजिस्टर मरीजों में ट्रायल के दौरान 1253 मरीजों की मौत हुई और ये मौतें 4 से 14 दिन के बीच हुईं।
मृत्यु के परिणामों में इन दवाओं के असर का अनुपात
रेमेडिसिविर 1.11
एचसीक्यू 1.59
लोपिनावीर 1.25
इंटरफेरॉन 1.39
कितने मरीजों को कौनसी दवा
मरीज दवाई
2750 रेमेडिसिवीर
954 एचसीक्यू
1411 लोपिनावीर
2063 इंटरफेरॉन
651 इंटरफेरॉन व लोपिनावीर
रेमेडिसिविर सर्वाधिक राजस्थान में दी जा रही
राजस्थान में कोरोना मरीजों को रेमेडिसिवीर सर्वाधिक दी जा रही है। सॉलिडेरिटी ट्रायल में जिन मरीजों को दवाएं दीं, उनमें मृत्यु के परिणामों में इनके असर का रेट रेशियो 1.11 रहा, जो सबसे कम था। डॉ. निशांत ने बताया कि साइंटिफिक ट्रायल में यदि परिणाम 1 से कम आते हैं तो वह अच्छे माने जाते हैं।
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