जयपुर शहर से निकलने वाले कचरे से बिजली उत्पादन का प्रोजेक्ट पर तीन साल बाद नगर निगम और कंपनी के बीच में काम करने की सहमति तो बनी, लेकिन प्रोजेक्ट फिर की मनमर्जी के रवैये ने अटका दिया। दरअसल प्लांट के लिए दिए जाने वाली जमीन को लेकर अभी भी निगम व कंपनी के बीच में विवाद बना हुआ है। कंपनी प्लांट की जमीन को खुद अवाप्त करवाना चाहती है। जबकि निगम उस जमीन का एग्रीमेंट करके काम करने के लिए अड़ा हुआ है। ऐसे में कंपनी द्वारा अभी तक प्रोजेक्ट पर काम ही शुरू नहीं किया है।

ना कचरा इकट्‌ठा कर पाई कंपनी, न निस्तारण किया, अब कार्रवाई

अब निगम के अधिकारियों ने कंपनी को तीन साल पहले दिए गए टैंडर का निरस्त करके फिर से टैंडर करने की तैयारी कर ली है। इसके लिए कंपनी को निगम के अधिकारियों ने नोटिस देकर अभी तक प्लांट का काम शुरू नहीं करने पर जवाब मांगा है। कंपनी के जवाब से निगम के अधिकारी संतुष्ट नहीं हुए तो अब टैंडर निरस्त कर दिया जाएगा और निगम के अधिकारी फिर से टैंडर निकालेंगे। कचरे का निस्तारण हाेने अाैर प्लांट शुरू हाेने से स्वच्छता सर्वेक्षण में जयपुर की रैंकिंग सुधरेगी।

  • 1400 टन कचरा एकत्रित किया जा रहा है, लेकिन शुरूआती तौर 700 टन कचरे से 12 मेगावाट बिजली उत्पादन का टारगेट तय किया है। लांगडियावास में 20 हेक्टेयर जमीन पर 182 करोड़ रुपए की लागत से प्लांट का निर्माण होगा।
  • जानकारों का कहना है कि कचरे से बिजली उत्पादन के इस प्रोजेक्ट से न केवल गंदगी बल्कि, प्रदूषण से भी मुक्ति मिलेगी। तीन साल पहले नगर निगम के अधिकारियाें ने लांगडियावास में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट बनाकर जल्द ही काम करने का दावा किया था। लेकिन अभी भी फाइल अफसराें के बीच में ही चक्कर लगा रही है।
  • नगर निगम ने वर्ष 2017 में ही जिंदल कंपनी को टैंडर दे दिया था। लेकिन, टैंडर की शर्तों में विवाद के चलते कंपनी इस प्रोजेक्ट को लेकर आनाकानी कर रही थी और तीन साल से कोई काम नहीं हो सका।


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Did not start plant work, did not respond to the notice, tender will be canceled
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